Sunday, 2 April 2017

Theory review - भगवा मुसलमान - राष्ट्रवादी मुसलमान!

24 दिसंबर,2002 का वो दिन था जब राष्ट्रवादी मुसलमानों और संघ के पदाधिकारी दिल्ली में एक साथ आये थे। ईद मिलन का समय था और कार्यक्रम की शुरुआत कुछ प्रतिष्ठित पत्रकारों,लेखकों तथा विचारक पद्मश्री मुज्जफर हुसैन और उनकी पत्नि नफीसा हुसैन,जो उस समय राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य थी के प्रयास से हुआ था। उस समय तक संघ अपने जीवन का 88 साल पूरा कर चुका था। इस कार्यक्रम में संघ के कई पदाधिकारी मसलन सरसंघचालक के.एस. सुदर्शन,मनमोहन वैद्य और इंद्रेश कुमार,मदन दास तथा साथ ही अखिल भारतीय इमाम काउंसिल के मौलाना जमील इलियासी,मौलाना वहीदुदीन खान आदि शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था कि जो खाई हिंदू और मुसलमानों के बीच पनप रही है उसे कैसे पाटा जाए?

चर्चा के शुरुआत में सुदर्शन जी जो सरसंघचालक थे,कहते हैं,"दुनिया केवल इस्लाम के हिंसा को देख रही है लेकिन इसके अलावा इसका दूसरा चेहरा भी है जो शांति का है। क्या इस तस्वीर को लाने के लिए हम मिलकर प्रयास नहीं कर सकते?"


उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा था कि भारत के मुसलमान अल्पसंख्यक का दर्जा क्यों स्वीकार किए हुए हैं जबकि वे इस भारतभूमि से जन्म से ही जुड़े हैं और हिंदुओं के समान संस्कृति,प्रजाति और पूर्वजों का साझा करते हैं?

इस प्रश्न का संतोषप्रद उत्तर किसी के पास नहीं था। इसकारण खाई को पाटने के लिए इंद्रेश कुमार जी द्वारा प्रयास किये गए। इससे पहले गांधीजी और हिंदू महासभा द्वारा कोशिश तो किये गए थे लेकिन असफल साबित हुए थे।

इंद्रेश कुमार विश्वास करते हैं,"जब हमसभी एकसमान पूर्वज,संस्कृति और मातृभूमि को साझा करते हैं तो विवाद कहाँ है?" जिसके फलस्वरूप एक नए आंदोलन 'राष्ट्रावादी मुस्लिम आंदोलन-एक नयी राह' जा जन्म हुआ। जिसका नाम बदलकर 2005 में 'मुस्लिम राष्ट्रीय मंच कर दिया गया।

आज के दिन में MRM का फैलाव 22 राज्यों में है और एक स्त्रोत के अनुसार इसके 10000 से ज्यादा सदस्य हो गए हैं जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

संघ के प्रयासों से राष्ट्रावादी मुस्लिम मंच की स्थापना ने मुसलमानों को संघ से जुड़ने का एक अवसर प्रदान कर दिया। इसका व्याख्या तो कई माध्यमों से किया जा सकता है लेकिन संघ के सांस्कृतिक स्वरुप को देखते हुए विश्लेषक इसके मुस्लिम मंच पर पैनी नजर रखने के बाद भी धोखा खा जाते हैं। शिव सेना के मुस्लिम शाखा प्रमुख और कांग्रेस के टोकन मुस्लिम जैसे समूहों से संघ के मुस्लिम मंच का तुलना बेमानी हो जाती है। संघ का स्वरुप जो किसी भी रूप में राजनीतिक नहीं है,ऐसी तुलना किसी राजनीतिक समूहों से करना अंधे विरोध की पराकाष्टा ही है। ऐसा ही विश्लेषण 'आजादी के बेटी' किताब के लेखक सीमा मुस्तफा द्वारा किया गया है।

इस मंच को लेकर एक आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि मुसलमानों के एक समूह को इससे जोड़कर भाजपा के लिए वोट करने का उद्देश्य छिपा हुआ है। इस तरह के आरोप तब बेबुनियाद हो जाते हैं जब हम काफी समय पहले बीबीसी फीचर सेवा पर छपे एक लेख पर ध्यान देते हैं। बहुत सीधा रास्ता है - गोडसे से सावरकर,सावरकर से दाएं-बाएं होते हुए संघ,और संघ तक पहुंचते ही अगला पड़ाव भाजपा है। इसी के साथ वामपंथियों,कांग्रेसियों और सेकुलरों की बौद्धिक यात्रा अपने गंतव्य पर पहुँच जाती है।

पर मैं इस प्रयास को बिल्कुल ही दूसरे नजरिये से देखता हूँ। मुसलमानों में संघ की छवि 'मुस्लिम विरोधी' के रूप में ही थी लेकिन वास्तविकता यह है - "संघ का मानना है जो मुसलमान हिंदुत्व(भारतीय संस्कृति) और भारतभूमि में विश्वास नहीं करता है हम उसके खिलाफ हैं।"

यह प्रयास और उपर्युक्त विचार मुस्लिम समुदाय में सेंध लगा दी। सीधे-सीधे मुसलामानों को दो खेमों में बाँट दिया,एक ओर वो जो राष्ट्रावादी मुस्लिम मंच के सदस्य हैं वे राष्ट्रावादी मुसलमान और दूसरी ओर अन्य। हमें इस विचार के पीछे के सोच को सलाम करना चाहिए कि आने वाले वक्त में इन राष्ट्रवादी मुसलमानों की संख्या में बढ़ोतरी होगी और ये बाकी मुसलमानों के बुरे विचारों पर अपने सही और शुद्ध विचार आरोपित कर देंगे जिससे न केवल राष्ट्र की नींव मजबूत होगी बल्कि सदियों तक एकता की भावना के साथ रहा जाना संभव हो पाएगा।

यह विचार गांधी आदि के विचारों से कई मायनों में अलग है। अन्यों के विपरीत यह भारतीय संस्कृति के उपासक के रूप में मुसलमानों और अन्यों को स्थापित करने का प्रयास करता है,भारतभूमि में आस्था को जगाने का प्रयास करता है जबकि दूसरों के विचारों में यह स्थानीय सोच देखने को नहीं मिलता।

यहीं वह प्रयास है जिसके बदौलत भविष्य में भारत के सारे मुसलमान अपने को गर्व से हिंदुत्ववादी और 'मैं हिंदू मुसलमान हूँ' कहना पसंद करेंगे जो न केवल राष्ट्रवाद की अलख को जगाएगा बल्कि सामाजिक सद्भाव को स्थापित करके समाज में एक मिसाल कायम करेगा जिसकी गूँज पूरे विश्व को गुँजयमान करेगी।
स्त्रोत - 1. hindustan times
           2. MRM