Tuesday, 25 April 2017

My diary - मोदी जी! अब व्यापक नीतिगत बदलाव की जरुरत है!

आजकल खबरों में एक नहीं कई सरकार पर और देश पर धब्बा लगाने वाले हरकत छाए हुए हैं।

1. नक्सलियों ने कई जवानों को मार गिराया है। आप केवल कह रहे हैं कि शहादत बेकार नहीं जाएगी। डैमेज कंट्रोल के लिए केवल "अब तक जो कार्रवाई की गई उसके कारण जो बौखलाहट है उनके अंदर, ये उसी का परिणाम है।" इतना कहने से काम नहीं चलेगा।

मूल समस्या प्रकाश सिंह के अनुसार," केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस में जो समन्वय होना चाहिए का नहीं होना है। राज्य पुलिस को केंद्रीय बलों के साथ जितना मिल-जुलकर काम करना चाहिए वो भी वो नहीं कर रहे हैं।" ये तो हमलों के कारण की ओर इशारा कर रहा है। पर एक व्यापक नीतिगत बदलाव की जरूरत है।

जब श्रीलंका जैसा मामूली सा देश लिट्टे का सफाया कर और इजराइल जैसा देश अपना साख बचा सकता है तो भारत क्यों नहीं?
कहीं हमारी राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी तो नहीं? भाजपा को किस बात का डर है? किसके वोट का डर है? आखिर विचारधारा के स्तर पर तो हम इन देशद्रोही हरकतों का सख्त विरोध करते हैं लेकिन व्यवहार में पिछड़ क्यों जा रहे हैं?

कहीं भाजपा और संघ के कथनी और करनी में अंतर तो नहीं आ रहा है? अगर नहीं तो जमीनी स्तर पर लड़ाई शुरू किया जाए। थोड़ा सा भी शक पर गोलियों से भून दिया जाए या बीच चौराहे पर फांसी पर लटका दिया जाए। हमारे घर के बच्चे सैकड़ों किलोमीटर दूर देश की रक्षा करने को जा रहे हैं और बेमौत मारे जा रहे है लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल बयानबाजी?

2. दूसरा मुद्दा है - गौरक्षकों को लेकर होने वाला वेवजह का विवाद!
इससे निपटने का सिर्फ एक ही तरीका है कि राष्ट्रीय स्तर पर गौहत्या रोकने का एक व्यापक क़ानून बनाया जाए और गौरक्षकों को लाइसेंस दिया जाए। इन गौरक्षकों को किसी भी प्रकार के कानूनी कार्रवाई से परे रखा जाए। यह दूसरा व्यापक नीतिगत बदलाव का हिस्सा है।

3. काश्मीर में पत्थरबाजों की संख्या बढ़ रही है। हाल में आयी एक खबर के मुताबिक कुछ 'पत्थरबाज लडकियां' भी देखी गयी हैं। ऐसे हालात में काश्मीर के कुछ विकृत मानसिकता वाले लोगों को बुलाकर स्क्रीन काला करने वाला एक चैनल नजरिया समझने के नाम पर मंच दे रहा है। मीडिया संस्थानों के सख्त निर्देश देने की भी जरुरत है कि किन मुद्दों का रिपोर्टिंग किस तरह करना है। ऐसे निर्देशों का उल्लंघन करने पर ऐसे संस्थानों और पत्रकारों को जेल की हवा खिलाना अवश्यंभावी हो गया है। पठानकोट की देश विरोधी रिपोर्टिंग और दिल्ली के एक विश्वविद्यालय में लगे देश-विरोधी नारे को असहमति का हक करार देने वालों को छोड़ना अब भारत का भविष्य खतरे से खाली नहीं रह गया है।

4. भगवा आतंकवाद का जुमला गढ़ने वालों और साध्वी ठाकुर और कर्नल पुरोहित जैसे देशभक्त नागरिकों को झूठे मुकदमे में फंसाने वालों को भी पाठ पढ़ाना चाहिए कि राजनीति के लिए इतने घिनौने काम नहीं किया जाना चाहिए। इनका जांच कर बड़े पार्टी के बड़े नेता को भी दोषी पाए जाने पर जेल भेजने से नहीं हिचकना चाहिए। अभी भले ही बॉम्बे हाई कोर्ट ने मालेगांव धमाका केस में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जमानत दे दी है। लेकिन दुनिया के सामने हिंदुत्व की छवि की जो बदनामी हुयी है उसका भरपाई कैसे होगा? दक्षिण कोरिया जैसा हमें भी भ्रष्टाचार और सरकारी झूठ के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस को अपनाना चाहिए।

मोदी जी! ये सब कुछ व्यापक नीतिगत बदलाव है जिसे हरहाल में लागू करना ही केवल और केवल एक मात्र उपाय है।
हम उबल रहे हैं! जनता का खून खौल रहा है! राष्ट्रवादी शौर्य परवान पर है! फिर मौका नहीं मिलेगा इसलिए अनिवार्य सैन्य सेवा लागू करके प्रशिक्षण देकर जंगलों में रह रहे नक्सलवादियों और शहरों के माओवादी गुरिल्ला,पाकिस्तान परस्तों और देशद्रोहियों का और यहां तक कि पाकिस्तान का भी समूल नाश करने का सही समय आ गया है।