Wednesday, 12 April 2017

Discourse - शिक्षा से जुड़े संघ के संगठन और संस्थाएं - ABVP - भारत में रहना है तो वंदेमातरम कहना है।

(बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी रााधिका रामशेषन के रिपोर्ट पर आधारित।)

विद्या भारती - वर्ष 1942 में गठित यह संगठन देशभर में सरस्वती शिशु मंदिर (प्राथमिक) और सरस्वती विद्या मंदिर (माध्यमिक) स्कूल चलाता है। इसका संगठन सरस्वती संस्कार केंद्र गरीबों के बीच काम करता है। विद्या भारती का मकसद एक राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है और हिंदुत्व के प्रति समर्पित युवा पीढ़ी तैयार करना है जिनमें राष्ट्रवाद की भावना कूटकूटकर भरी हो।

अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना - इसकी स्थापना अयोध्या में राम मंदिर अभियान के अहम रणनीतिकार मोरोपंत पिंगले ने वर्ष 1979 में की थी। इसका उद्देश्य राष्ट्रवादी दृष्टिकोण से भारतीय इतिहास लिखना है, जिसे अंग्रेजों ने 'तोड़मरोड़कर' पेश किया है।

विज्ञान भारती - संघ और भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलूरु के कुछ वैज्ञानिकों ने 1982 में स्वदेशी विज्ञान आंदोलन के रूप में इसकी शुरुआत की थी। 1990 में इसका नाम बदलकर विज्ञान भारती किया गया था। इसका मकसद भारतीय विरासत को आगे बढ़ाना, भौतिक और आध्यात्मिक विज्ञान के बीच तालमेल कायम करना और देश के पुनर्निर्माण के लिए विज्ञान एवं तकनीक में स्वदेशी आंदोलन को पुनर्जीवित करना है।

एबीवीपी - संघ और उसकी छात्र शाखा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद शिक्षण संस्थानों में अलग-अलग काम करती हैं। कभी-कभार दोनों संस्थाएं एकजुट भी हो जाती हैं। एबीवीपी का दावा है कि 2016 में उसके 31 लाख सदस्य थे। आधिकारिक रूप से इसकी स्थापना 1949 में मुंबई के शिक्षाविद यशवंतराव केलकर ने की थी। इसके दो साल बाद भारतीय जन संघ अस्तित्व में आया था। संघ के इस सबसे पुराने प्रमुख संगठन का सबसे पसंदीदा नारा है - भारत में रहना है तो वंदेमातरम कहना है।

ABVP के मुख्य मुद्दे हैं -

कश्मीरी हिंदुओं का विस्थापन, कश्मीर घाटी में अलगाववाद, असम में अवैध घुसपैठ, नदियों की सफाई, निजी कॉलेजों और विश्वविद्यालय पर लगाम कसने के लिए नियामक प्राधिकरण, विश्वविद्यालयों में छात्र संघों के चुनाव दोबारा शुरू करवाना, पेशेवर विश्वविद्यालयों में दाखिले की चाहत वाले छात्रों के लिए सब्सिडी वाले कोचिंग सेंटर खोलना, दलितों, पिछड़ों, महिलाओं के लिए ज्यादा सरकारी विश्वविद्यालय खोलना।

ABVP के आंदोलन और मुकाम -

जनवरी 2012: पुणे के एक कॉलेज में 'वॉयसेज ऑफ कश्मीर' संगोष्ठी में कश्मीर पर संजय काक की फिल्म जश्ने आजादी का विरोध।

अप्रैल 2012: उस्मानिया विश्वविद्यालय में बीफ फेस्टिवल पर हमला।

सितंबर 2013: हैदराबाद में कश्मीरी फिल्म महोत्सव पर हमला।

दिसंबर 2014: हिंदी फिल्म पीके का विरोध।

अगस्त 2016: जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार हनन के बारे में कार्यक्रम आयोजित करने पर एमनेस्टी इंटरनेशनल के खिलाफ पुलिस में शिकायत।

जुलाई-अगस्त 2015, दिसंबर 2015 और जनवरी 2016: मुजफ्फरगनर सांप्रदायिक हिंसा पर बनी फिल्म का प्रदर्शन हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में करनके दौरान एबीवीपी और अंबेडकर स्टूडेंट्स यूनियन (एएसए) के सदस्यों के बीच झड़प, रोहित वेमुला और एएसए के पांच सदस्य निलंबित, रोहित ने आत्महत्या की।

फरवरी 2016: जवाहर लाल विश्वविद्यालय के छात्रों ने 2001 में संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु और कश्मीरी अलगाववादी मकबूल बट्टï की फांसी का विरोध किया, एबीवीपी ने इसका विरोध किया, जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्वाण भट्टाचार्य देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार।

फरवरी 2017: जेएनयू के उमर खालिद और शेहला राशिद को रामजस कॉलेज में बोलने के लिए आमंत्रित करने पर एबीवीपी की दिल्ली विश्वविद्यालयों के छात्रों से झड़प।

Discourse - संघ और शिक्षा : प्रज्ञा प्रवाह द्वारा वास्तविक समाज-निर्माण!