Thursday, 30 March 2017

My diary - संघ प्रमुख मोहन भागवत के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बनाये जाने के किसी भी वार्त्ता के विरोध में!

शिवसेना की पत्रिका सामना में संघ प्रमुख मोहन भागवत को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाए जाने के संबंध में लिखा गया,उसके बाद तो कई अटकलें लगाई जाने लगी। शिवसेना के ही सांसद संजय राउत ने कहा था कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए भागवत को सर्वोच्च पद लेना चाहिए। वह हर लिहाज से इसके लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं।

अगर ऐसा होता है तो बहुत ही बकवास संदेश स्वयंसेवकों और लोगों में जाएगा कि संघ के उतने बड़े पोस्ट पर बैठा व्यक्ति भी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा पर काबू नहीं कर पाया जो संगठन के लिए काफी ही बुरा होगा। संघ का अभी तक का इतिहास बताता है कि कोई भी सरसंघचालक मृत्यु या अस्वस्थ होने के अलावा अपने पद को नहीं छोड़ा है,अगर भागवत के मामले में ऐसा होता है तो यह न केवल संघ की परंपरा का उल्लंघन होगा बल्कि स्वयंसेवकों के साथ धोखा भी होगा कि हमें देशप्रेम को लेकर झांसे में रखा जा रहा है।

संघ जिस सांस्कृतिक कार्यों के लिए बना था और आज अगर इतने आलोचना झेलने के बाद भी बाकियों के मुकाबले मजबूती से अडिग है तो वह केवल अपने उन्हीं सांस्कृतिक कार्यों के बदौलत है। अगर इसका प्रमुख ही राजनीतिक पद को धारण कर लेगा तो कुल मिलाकर संघ को राजनीति में आने का एक जरिया समझा जाना लगेगा,जिससे स्वयंसेवकों में न केवल त्याग की भावना का लोप होगा बल्कि अन्य लोगों का जुड़ाव स्वार्थवश और लोभवश होने लगेगा जिससे संगठन निश्चित रूप से अधोगति को पा जाएगा।

लेकिन खुशी की बात यह है कि इन सब अटकलों पर संघ प्रमुख ने खुद ही विराम लगा दिया है। राष्ट्रपति बनने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मीडिया में ऐसी खबरें सिर्फ अफवाह हैं। नागपुर के राजवाड़ा भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया में जो चल रहा है वह होने नहीं जा रहा। साथ ही उन्होनें यह भी कहा कि वह संघ के लिए ही काम करते रहना चाहते हैं। वह ऐसे किसी प्रस्ताव पर विचार भी नहीं कहेंगे। अगर प्रस्ताव आता भी है तो हम उसे स्वीकार नहीं करेंगे।

यह एक मिसाल है कि जिसतरह स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण एक नैतिक आदर्श पर होता है और उसका पालन करना सभी के लिए कर्तव्य के सामान होता है। ऐसा हर कोई करता है चाहे वह संघ के किसी भी पद पर हो और वह है - निःस्वार्थ भाव से देश सेवा और समरस समाज के निर्माण का प्रयास!