Tuesday, 28 March 2017

Hindu Nation - नमो-नमो के बाद योगी-योगी : कहीं शुभ संकेत की आहट तो नहीं?

आज मीडिया का रंग बदल गया है चाहे प्रिंट हो या इलेक्ट्रॉनिक! जिस मीडिया को कभी मोदी गोधरा कांड के गुनाहगार और मुसलमानों के लिए मौत का सौदागर नजर आते थे,वे आज अपने कर्मठ व्यक्तित्व के कारण अपने को विकास का एक नायक के रूप में स्थापित कर चुके हैं। जब वाजपेयी से प्रधानमंत्री की उम्मीदवारी लेकर आडवाणी को दी गयी तो यहीं मीडिया और छद्म वामपंथी-उदारवादी-कठमुल्ला जमात कहता नजर आया था कि आडवाणी संप्रदायिक हैं और वाजपेयी सेकुलर और इसी को आडवाणी-मोदी प्रकरण में दोहराया गया। 2014 कि घटना तो सभी को याद होगी कि कैसे कुछ ही दिनों में आडवाणी सेकुलर और मोदी संप्रदायिक हो गए थे। इस बात को कौन भूला होगा कि आज के दिनों में मोदी सेकुलर और योगी संप्रदायिक है। आने वाले दिनों में योगी के समकक्ष और उसी व्यक्तित्व का कोई दूसरा नेता और कार्यकर्त्ता आ जाएगा तो मुझे इस बात को सुनकर कोई ताज्जूब नहीं होगा कि मीडिया घरानों के नजर में योगी सेकुलर और नया व्यक्ति संप्रदायिक हो गया है।

योगी का चुनाव कोई अतिश्योक्ति नहीं बल्कि एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है - गोरखनाथ मठ के महंत की पहचान किसी जाति से नहीं जुड़ी है। आज जब उनके मठ से सीधे ही मीडिया रिपोर्टिंग हुयी तो लोगों को मालूम चला कि योगी कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि प्रकृति द्वारा तरासा हुआ वो नमूना हैं जो सदियों में कभी-कभार पैदा होते हैं। जिनके द्वारा दलित-आदिवासियों आदि के उत्थान के लिए चलाये गए मुहीम को देखकर लगता है कि इन्हें इतिहास में एक कुशल प्रशासक के साथ-साथ महान समाज सुधारकों जैसे-दयानंद सरस्वती,विद्यासागर आदि जैसे ही याद किया जाएगा। यहीं कारण है कि उनके खिलाफ किये गए फर्जी मुकदमों को आज चर्चा का विषय नहीं बनाया जा रहा है।

योगी बेहद लोकप्रिय हैं,लगभग 19 साल से हाशिये पर रहे इस करिश्मे को शाह ने बखूबी पहचाना। बिजनेस स्टैंडर्ड में राधिका रामशेषन लिखते हैं,"वह अविवाहित हैं और इसलिए पारिवारिक भ्रष्टाचार से मुक्त हैं, हिन्दुत्व पर कोई समझौता नहीं करते हैं, युवा और कठोर प्रशासक हैं।" 

पार्टी के एक सूत्र ने कहा,"सबसे अहम बात यह है योगी उत्तर प्रदेश में भाजपा की पुरानी परंपरा के नेताओं से पूरी तरह अलग हैं। सिन्हा, राजनाथ और कुछ हद तक मौर्य भी उसी परंपरा के हैं। अगर इनमें से कोई भी मुख्यमंत्री बनता है तो यह पुरानी व्यवस्था का ही विस्तार होता। फिर वही भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद की कहानी दोहराई जाती।"

यहीं सब भाजपा को अन्य पार्टियों से अलग करती है कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ किस तरह काम करने को लालायित है ताकि भारत के पुराने गौरव को हासिल किया जा सके। हम केवल विकास के बदौलत इस गौरव को तो पा नहीं सकते,जब तक हिंदुत्व सरीखे भारतीय संस्कारों और जीने की कला को लोगों के जेहन में उतारकर उसे एक राष्ट्रीय पहचान हिंदू न दे दें। यह सब योगी जैसे व्यक्तित्व के बदौलत ही हो सकता है। अब वो दिन दूर नहीं होगा जब भारत की पहचान हिंदुत्व होगी और हर भारतवासी गर्व से कहेगा कि हम हिंदू हैं और यहीं मेरी राष्ट्रीयता है। इसे किया जा सकता है अगर 'घर वापसी' जैसे कार्यक्रमों को सही तरीके से चलाया जाए। यहीं तो वह 'शुभ संकेत' है जिसकी आहत सभी को सुनाई दे रही है और हिंदू राष्ट्र का सपना ज्यादा दूर नहीं है! बहुत जल्द ही पुराने गौरव की डंका को बजागर फिर से सदियों तक पूरे विश्व को गुंजायमान किया जाएगा!