Tuesday, 14 February 2017

चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन और दैनिक जागरण

दैनिक जागरण पर आरोप लगाया गया है कि इसके वेबसाइट पर यूपी चुनाव के पहले चरण के बाद ही एग्जिट पोल दे दिया गया। जागरण के स्पष्टीकरण के बाद भी आयोग अपने रुख पर कायम रहा।

चुनाव आयोग का यह फैसला बहुत ही सही है,इसपर अंगुली नहीं उठाया जा सकता। आने वाले दिनों में जाँच के बाद बहुत जल्द ही स्पष्ट हो जाएगा कि यह भूल थी या जानबूझकर किया गया था। अगर जानबूझकर किया गया तो किसके कहने पर किया गया? क्या इस प्रक्रिया में किसी पार्टी विशेष से पैसा भी लिया गया?

ये सभी अनजाने सवालों के उत्तर अभी पर्दे के पीछे हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह कि जिस पार्टी को बड़ी पार्टी के रूप में जागरण द्वारा बताया गया था क्या उस पार्टी की मिलीभगत मीडिया संस्थानों से तो नहीं ताकि चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया जा सके। अगर है और जाँच में पाया जाता है तो यह बहुत ही खतरनाक है।

कानून स्पष्ट है," जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 ए के मुताबिक यूपी चुनाव पर कोई भी व्यक्ति, 4 फरवरी की सुबह 7 बजे से लेकर 8 मार्च के शाम साढ़े 5 बजे तक कोई एग्जिट पोल नहीं कर सकता या इनके नतीजों को प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रकाशित नहीं कर सकता। दोषी पाए जाने पर दो साल की कैद या जुर्माना या दोनों ही सजा का प्रावधान है।"(व्याख्या करके लिखा गया है।)

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में जिस मीडिया को जाना जाता था,उसके पतन को रोकने का एकही तरीका है कि मामूली गलती पर भी कानून के मुताबिक कठोर दंड दिया जाए।

मामले को सतह पर आने के बाद चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के 15 जिले के चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे दैनिक जागरण के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में संपादकीय विभाग के मीडिया हेड के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करायें और इसके बाद दैनिक जागरण के  प्रबंध संपादक, संपादक और एग्जिट पोल कराने वाली संस्था रिसोर्स डेवलपमेंट इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड यानि आरडीआई के खिलाफ जिला चुनाव अधिकारियों द्वारा केस दर्ज कराया गया।

केस दर्ज कराने के बाद जागरण डॉट कॉम के संपादक शेखर त्रिपाठी और अन्य अधिकारियों तथा संपादकों को गाजियाबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया है।

हालांकि जागरण की ओर से कहा गया है,"डिजिटल इंग्लिश प्लेटफॉर्म के अलावा एग्जिट पोल से संबंधित खबर दैनिक जागरण अखबार में नहीं छापी गयी। इंग्लिश वेबसाइट पर एग्जिट पोल से जुड़ी एक खबर अनजाने में डाली गयी थी, इस भूल को फौरन सुधार लिया गया और संज्ञान में आते ही वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ से संबंधित न्यूज रिपोर्ट को तुरंत हटा दिया गया था।’’

फिर भी चुनाव आयोग अपने आदेश पर कायम रहा। बहुत जल्द ही सच्चाई निकलकर सामने आ जाएगी।