Wednesday, 21 December 2016

लव जिहाद खतरनाक स्थिति को पा चुका है -

हाल में ही दो अजीबोगरीब घटनाएं घटित हुई - पहला,बॉलीवुड से ताल्लुक रखने वाली एक दंपति ने अपने बच्चे का नाम तैमूर रखा है और दूसरा,2015 की सिविल सेवा टॉपर का शादी का फैसला(बौद्धिक लव जिहाद)।
'तैमूर' नाम का रखा जाना उसी इस्लामिक परंपरा का प्रभाव है जिसका असर हर मुसलमान पर रहता है कि अपने धर्म का प्रचार कर जन्नत के द्वार के नजदीक पहुँच जाएँ। जाहिर है तैमूर नाम रखने के पीछे मुसलमान पिता के उसूलों को तवज्जो दिया गया होगा और एक हिंदू माँ को नजरअंदाज कर दिया गया होगा क्योंकि इन्हें पहले ही पैसे और शोहरत की लालच ने लव जिहाद का शिकार बना दिया है।
ये ऐसा पिता है जो एक खूनी योद्धा पर मुसलमान होने के कारण गर्व करता है और नामकरण करके उसका उजागर भी कर दिया है। बीबीसी हिंदी अपने एक आलेख में लिखता है,"तैमूरलंग इतिहास में एक खूनी योद्धा के तौर पर मशहूर हुए। 14वीं शताब्दी में उन्होंने युद्ध के मैदान में कई देशों की जीता। कहते हैं कि तैमूरलंग को अपने दुश्मनों के सिर काटकर जमा करने का शौक था।"
दूसरे शब्दों में इन मुसलमान स्टारों द्वारा 'लव जिहाद' को बढ़ावा देने का यहीं तरीका है कि बहलाफुसलाकार हिंदू नारी से शादी करो और बाद में इस्लाम के उसूलों में पिरोकर अंतरराष्ट्रीय साजिस के तहत हिंदू जनसंख्या को कम करने का प्रयास करें। यह तो ऊँचे स्तर की बात है जिसे इतना उछाला गया,आम आदमी के बीच तो यह गंभीर रूप धारण कर चुका है।
'लव जिहाद' की पराकाष्टा का दूसरा रूप तो हमें 2015 के सिविल सेवा टॉपर के शादी के फैसले में देखने को मिला। एक लड़की जो की दलित है जिसका सरोकार हिंदू परंपरा से है,और वहीं लड़का इस्लामिक परंपरा को मानता है। इसपर हिन्दू महासभा नाम का एक संगठन लिखता है,"इससे लव जेहाद को बढ़ावा मिलेगा। इस निर्णय से पूरा हिन्दू समाज आक्रोशित है। यद्यपि गांधी जी का अहिंसा का सिद्धांत देशहित में नहीं था, परन्तु एक लोकतांत्रिक संगठन होने के कारण हिन्दू महासभा गांधीगिरी के द्वारा इस विवाह का विरोध करेगी। शीघ्र ही बुद्धि-शुद्धि यज्ञ का आयोजन होगा।"
पर इस शादी के ऐलान के कई मायने निकाले जा सकते हैं - उन दलित बुद्धिजीवियों के लिए यह जोर का तमाचा है जो परिणाम के दिन पूरे हिन्दू समाज को ब्राह्मणवाद के नाम पर गाली दे रहे थे। आज स्थिति यह हो गयी है कि ये शर्म के कारण मर रहे हैं कि हमारा दलित समुदाय एक अच्छा लड़का भी नहीं दे पाया?
दूसरा,आने वाले दिनों में कुछ लोग इस शादी को दलित-मुसलमान गठजोड़ के रूप में पेश करेंगे और अपनी राजनीतिक बढ़त बनाने का प्रयास करते नजर आएंगे।
तीसरा और अंतिम सबसे महत्वपूर्ण की यह 'बौद्धिक लव जिहाद' हैं जिसमें शब्दों के जाल में हिन्दू पढ़ी-लिखी बालिकाओं को इसतरह उलझा दिया जाता है कि वह समझ ही नहीं पाती कि सामने वाला सच्चा है या झूठा?