Thursday, 15 December 2016

रामराज्य रूपी भारत में राम रूपी मोदी!

लगता है भारत अपने अतीत के गौरव को बहुत जल्द पा लेगा। रामराज्य स्थापना की दिशा में अब तक का सबसे मजबूत कदम 'नोटबंदी' को धरातल पर उतारकर भ्रष्टाचार को जड़ से मिटा देने का कोशिश रंग ला रही है।

भारत फल-फूल रहा है। 'नींदमग्न सुंदरी' जाग उठी है। हम भाग्यशाली है। हम और हमारे बच्चे रंगीन सपनों की इस दुनिया में आगे बढ़ रहे हैं। मोदी पूरे विश्व में भारत की छवि विश्व गुरु वाली बनाने को प्रयत्नशील है।

वर्तमान सरकार एक नए भारत की तस्वीर बनाएगी। यह विकास का ही परिणाम है कि विलास से परिपूर्ण हम मेट्रो ट्रेन में सफर कर रहे हैं। कोई ऐसा व्यक्ति नहीं होगा जिसके पॉकेट में मोबाइल नहीं होगा? यह सब इसी विकास की पहचान है। यहीं तो हर व्यक्ति को चाहिए।

भले ही विकास के मायने हर व्यक्ति के लिए अलग हो। किसी के लिए यह लाभकारी सिद्ध होता है तो किसी के लिए विनाशकारी लेकिन फिर भी यहीं वह माध्यम है जिसके बदौलत हम उस विनाश को भी कम कर सकते हैं और तरक्की की नयी इबारत भी लिख सकते हैं। इससे हम भौतिक सुख तो पा सकते हैं,लेकिन मानसिक और अध्यात्मिक सुख के लिए हिंदुत्व हमारे सामने है। विकास के साथ-साथ इस हिंदुत्व को भी अपनाने की जरुरत है।

आरोप तो लगते रहते हैं। रामराज्य में भी राम पर सीता को लेकर आरोप लगे और अंततः सीता को जंगल भेजना पड़ा। यह ताज्जूब की बात नहीं।

हमें तो वर्तमान प्रधानमंत्री में राम का प्रतिबिंब दिखाई दे रहा है,वे जनता के सुख और आजादी के लिए अपने परिवार और अपनी प्यारी पत्नी सीता को भी त्याग दिए,ठीक उसी तरह नरेंद्र मोदी भी देश-जनता के लिए अपनी पत्नी और परिवार की कोई तवज्जो नहीं दी,आज प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनका परिवार आम नागरिक की तरह जीवन-वशर करता है। जिस धोबी द्वारा रामराज्य में सीता की चरित्र पर लांछन लगाया गया था वो बाद में राम की महानता पर रोता घूम रहा था और मुग्ध था।

आज भी कई लोग और नेता मोदी पर कोर्ट,डिग्री,बीबी और घूस का आरोप लगाते हैं और मुंह का खाते हैं,ठीक उसी तरह जिसतरह वह धोबी जो दूसरों का मैल तो धोता था लेकिन अपने गिरेबान का नहीं। ये नेता और लोग मोदी रूपी राम में तो कमियाँ देख लेते हैं लेकिन अपनी नजर नहीं आती। इन्हें उस रामराज्य के धोबी से तो कम नहीं आँका जा सकता?