Tuesday, 13 December 2016

आज का सबसे प्रमुख समस्या - व्यक्ति की है!

आधुनिक सभ्यता की समस्याओं में से एक और सबसे ज्वलंत समस्या है-व्यक्ति की समस्या। जो एक ओर पूँजीवादी समाज तथा दूसरी ओर अत्यंत केंद्रीकृत राज्य-व्यवस्था अर्थात समाजवाद द्वारा लगातार कुचला जा रहा है। शायद इन सबसे ज्यादा बदतर स्थिति तो मिश्रित राज्य-व्यवस्थाओं में है,भारत में व्यक्ति की स्थिति ऐसी हो गयी है कि "धोबी का कुत्ता न घर का,न घाट का"।
इसीकारण 'व्यक्ति' में एक अजीब किस्म का अलगाव(alienation) का प्रवृति का विकास होते जा रहा है। अगर भारत के संदर्भ में देखें तो इस अलगाव के कारण हमारे सामने पाँच प्रकार के व्यक्तियों का पहचान आता है -
-एक,किसी खास पार्टी/संगठन का समर्थक,जिसे उपमावश 'भक्त' कहा जा रहा है।
-दूसरा,एकतरफा विध्वंशक आलोचक,जिसपर फंडेड होने का आरोप लगता रहा है।
-तीसरा,संतुलित विचार रखने वाले,फिर भी कोई पैमाना नहीं कि क्या वे वाकई संतुलित हैं?
-चौथा,वे जो निष्पक्ष होने का दावा करते हैं,पर अलग-अलग व्यक्तियों के लिए सच्चाई कुछ और ही रहता है।
-पाँचवा व अंतिम,अन्य छोटे-छोटे पार्टियों/संगठनों के समर्थक।
"इन सबमें से कुछ या इन सबसे अलग जहाँ तक साधारण नागरिक का प्रश्न है,वह अपना सारा समय अपने आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए कठिन प्रयासों को करते हुए और इसी चिंता में अपना कीमती समय बिता देता है।"
ये साधारण जन मामूली किसान से लेकर दिहाड़ी मजदूर से निम्न मध्यमवर्गीय परिवार को अपने अंदर समेट लेता है,इन्हें ही किसी अचानक बदलाव की सबसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है - नोटबंदी एक उदाहरणस्वरूप ही है।
इस साधारण जन को वास्तव में सांस्कृतिक,नैतिक और सामाजिक विकास का मौका ही नहीं मिलता। अपने कठिन प्रयासों ताकि आर्थिक स्थिति को सुधारा जा सके,के कारण व्यक्ति का व्यक्ति से संपर्क लगभग टूट गया है या टूटते जा रहा है। कहीं-कहीं होने वाले छोटे-मोटे आंदोलनों में शिरकत से तो संपर्क बनता है,लेकिन कभी आंदोलन के उद्देश्य प्राप्ति और कभी उद्देश्य के भटकाव से आंदोलन के ठप हो जाने के कारण अंततः व्यक्ति पुनः अलगाव की स्थिति में ही आ जाता है।
इसकारण इस 'अलगाव' को दूर करने का वक्त आ गया है,इसकारण सामाजिक स्तर पर नए प्रयास की जरुरत है या हो रहे प्रयासों जैसे - संघ का शाखा या अन्य संगठनों के क्रियाकलाप में से बेहतर को आपको ही चुनना है,पर ध्यान केंद्रित किया जाए या नए किस्म के राज्य-व्यवस्था की जरुरत है जो व्यक्ति के समस्याओं के अलगाव का हल ला सके और दुनिया को एक आदर्श दे सके।