Wednesday, 9 November 2016

प्रधानमंत्री मोदी के भाषण का खास बात और समीक्षा!

          अपने भाषण के शुरुआत में ही मोदी आलोचकों को बेहतरीन ढंग से जवाब देते हुए कहते हैं कि पिछले ढाई वर्षों में 125 करोड़ भारतीयों के समर्थन से भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में 'चमकीला सितारा'(bright spot) के रूप में उभरा है। ध्यान देने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन्होंने यह नहीं कहा है कि केवल हिंदुओं या एक ख़ास समुदाय के सहयोग से,जिसे लेकर समय-समय पर आरोप लगते रहे हैं। चुनावी समय में इनका एक ब्यान की मैं 'हिंदू राष्ट्रावादी' हूँ,को पेश किया जाता रहा है। (आलोचक इस हिंदू शब्द को ही सही से पेश नहीं कर पाते हैं तो बाकी बातें समझना दूर का रास्ता है।)
          ये आगे कहते हैं हमारी सरकार का मुख्य ध्येय है - 'सबका साथ,सबका विकास।' हमारी सरकार गरीबों को समर्पित है,हमें गरीबों से लड़ना है और अर्थव्यवस्था में हुयी प्रगति के लाभ को इनसभी तक भी पहुँचाना है।
प्रधानमंत्री जनधन योजना,जनसुरक्षा योजना,मुद्रा योजना,स्टार्ट अप,स्टैंड आप,फसल बीमा आदि ये सब हमारे इसी ध्येय को पूरा करने के लिए है।
         (इन योजनाओं के खूबियाँ और कमियों के लेकर विस्तृत चर्चा हो सकती है। पर जिस उद्देश्य को इन सभी योजनाओं में बताया गया है अगर इसे धरातल पर उतार दिया गया तो पिछले 60 वर्षों में जो तरक्की और समाधान नहीं हो पाया उसे पाया जा सकता है,इसे धरातल पर उतारने की जिम्मेवारी हम सबकी है,यहाँ की जनता है।)
          काला धन और आतंकवादी गतिविधियों का संबंध बताते हुए,ये सवाल उठाते हैं कि आखिर कैसे आतंकवादी इन पैसों को पा लेते हैं? सीमा पार जाली नोटों से संबंधित कई संदिग्ध गतिविधियाँ संचालित होती रहती है।
          एक ओर आतंकवाद से संबंधित समस्या है तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार और काला धन का। काला धन के लिए सरकार कई प्रयास कर रही है - 2015 में एक कानून बनाया गया है,कई देशों के साथ समझौता हुआ है,बेनामी ट्रानजैक्शन पर रोक लगाने के लिए अगस्त,2016 में एक कानून लागू हुआ,बिना पेनाल्टी दिए एक स्कीम भी घोषित हुआ है ताकि लोग अपने काले धन को घोषित कर सकें।
           इस काले धन का दुरुपयोग बताते हुए मोदी आगे कहते हैं,"इन पैसों का गलत उपयोग के कारण ही माल,सेवा(घर,भूमि,हायर एजुकेशन आदि) के मूल्य में कृतिम बढ़ोतरी हुई है।"
         इस बात को दिमाग में बैठाने लायक है,अगर वाकई में ऐसा है तो इन पैसों पर अंकुश लगाकर काफी हद तक मूल्य को कम किया जा सकता है। हालाँकि इस पर अर्थशास्त्रियों का मत बँटा हुआ है।
         इन पैसों का सक्रियता मजबूती से हवाला कारोबार से जुड़ा हुआ है जिसका इस्तेमाल हथियारों के अवैध व्यापार में भी होता है।
          इसलिए भ्रष्टाचार और काले धन के इस पकड़ को तोड़ने के लिए हमने 500 और 1000 के नोट को आज रात से बंद करने का फैसला किया है।
          (प्रधानमंत्री मोदी का अबतक का काले धन को लेकर मास्टर स्ट्रोक है। इसे लेकर तत्काल में जो समस्या उत्पन्न होती उसका पहले ही अनुमान लगाकर सरकार ने समाधान भी दिया हुआ है जो मोदी के भाषण का मुख्य अंश भी था।)
           इसपर भी अर्थशास्त्रियों का मत बँटा हुआ है।
           बीबीसी पर छपी एक खबर के मुताबिक अर्थशास्त्री अलोक पुराणिक कहते हैं,"अगर उदाहरण लें कि दो करोड़ की डील है और चेक से एक करोड़ दिए जा रहे हैं तो बाकी का एक करोड़ सौ रूपए में तो नहीं दिया जाएगा। वो तो पांच सौ या हज़ार में ही होगा। अब प्रधानमंत्री की घोषणा से काले धन पर नियंत्रण हो सकता है।"
          पर उनके लिए दिक्कत है जिनके पास बैंक खाते नहीं हैं। ये एक बड़ा झटका है।
         (लेकिन मेरा मानना है कि भविष्य में सारी जनता का वित्तीय समावेशन हो पायेगा आखिर जनधन योजना किस काम आएगा,सरकार इसी उद्देश्य के लिए तो इस योजना को लायी थी।)
         पुराणिक आगे कहते हैं,"अगर पैसे जितने भी हों लेकिन उसका हिसाब किताब हो,तब कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत वहां है जहां आपके पास पैसे का हिसाब नहीं हैं।"
          वहीं एक अन्य आर्थिक मामलों के पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता कहते हैं,"प्रधानमंत्री के इस ऐलान ने लोगों को हैरान कर दिया है। असल तस्वीर तो अगले कुछ दिनों में साफ होगी कि कितना काला धन इस तरीके से बाहर आ सकेगा। हालांकि लोगों को थोड़ा डर तो है कि वो बाज़ार में जाते हैं और उनके पास पांच सौ या हज़ार रूपए का नोट ही है तो वो कैसे सामान ले पाएंगे। सरकार को लोगों को भरोसा दिलाना चाहिए कि जिनके पास काला धन नहीं है उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी।"
          (एक शंका गहराता नजर आ रहा है कि कहीं लोग जिनके पास बड़ी रक़म कैश के तौर पर है भी वे अपने एजेंट्स के ज़रिए उन्हें बदलवा न लें,तब सरकार को नोट बंद करने का कोई फायदा नहीं मिल पाएगा।)
           कई लोग और पत्रकार सरकार द्वारा 2000 के नए नोट को लाने पर भी सवाल उठा रहे हैं,पूर्व मंत्री चिदंबरम तो एक प्रेस कांफ्रेंस में इसे एक पहेली बता दिए हैं हालाँकि वे कहते हैं कि अगर काले धन पर अंकुश लगता है तो सरकार का कदम स्वागत योग्य है।
           आलोचनाएँ तो होती रहती है इसलिए कुछ लोग पूर्व का उदाहरण देकर इसे बकवास बताने को तुले हुए हैं,वे कह रहे हैं कि इस तरह का क़दम 1978 में भी उठाया गया था लेकिन विफल हो गया था।
क्या इसका मतलब यह हुआ कि टाइटैनिक जो अपनी पहले ही यात्रा में। डूब गया था,इसकारण उतने बड़े जहाज को नहीं बनाना चाहिए?
सरकार का पक्ष रखते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, "इस देश को कैशलेस इकॉनमी की ओर ले जाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। यह समानांतर रूप से चल रही कालेधन की अर्थव्यवस्था को खत्म करने की दिशा में उठाया गया कदम है। एक बार पैसा मुख्य बैंकिंग धारा में आ जाती है तो यह मौजूदा अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन जाता है।"
वास्तव में 8 नवंबर का भाषण अर्थव्यवस्था,काला धन,भ्रष्टाचार और इसके रोक पर केंद्रित था।