Tuesday, 15 November 2016

जन चर्चा में आज बातें गलियों से - पत्रकारिता का गिरता साख! - 1/1

"जो अपने बीबी का नहीं हुआ,देश का क्या होगा! सुन रहे हो भक्तों?"
"यहीं त्याग तो मोदी को महान बनाता है।"
"अपने बीबी को लात मारकर भगा दो और कहो कि त्याग है।"
"बुद्ध और महावीर का महानता तो जानते होगे गैर-भक्त?"
"कहाँ बुद्ध और कहाँ फेकू?"
"दोनों में क्या अंतर है?"
"उससे मुझे क्या? बीबी को लात मारना त्याग है क्या?"
"नमक सत्याग्रह के दौरान गाँधीजी अपने बीबी से क्या बोले थे,मालूम है?"
"क्या?"
"आप जैसी औरत के बदौलत ही मैं ये अहम मुकाम हासिल कर पाया,आपने जो त्याग किया है उसे मैं भूल नहीं सकता,मैं देश के खातिर आपसे बहुत दिनों से मिल नहीं पाया।"
"वो अलग बात है।"
"कैसे?"
"कुतर्की भक्त,भक्ति छोड़ोगे तभी समझ आएगा।"
"समझ का भक्ति से क्या संबंध है गैर-भक्त?"
"फेकू कहता है,मैं चाय बेचने वाला था और 10 लाख का कोर्ट पहना था।"
"किसी का निजी जीवन क्या है? उससे क्या मतलब है? अगर वो सरकारी पैसा होता तो सवाल पूछना वाजिब था।"
"ये जूमला वाली सरकार है,पर भक्त को नहीं समझ आएगा।"
"कुछ मालूम भी है या ऐसे ही बके जा रहे हो।"
"क्यों मालूम नहीं है? मैं रोज स्क्रीन काला करने वाले का चैनल देखता हूँ,मुझे दुनियादारी और राजनीति की अच्छी समझ है।"
"भाजपा का मेनिफेस्टो क्या था?"
"मुझे सब मालूम है,ये जूमला वाली सरकार है।"
"आम आदमी पार्टी का मेनिफेस्टो क्या था?"
"मुझे सब मालूम है,यह सरकार दिल्ली की तस्वीर बदल दी।"
"भाजपा के मेनिफेस्टो के बारे में कुछ तो बताइये,जिससे आप साबित कर सकें कि यह जूमला की सरकार है और मोदी फेकू है।"
"ओए भक्त,काहे माथा खा रहे हो,मुझे सब मालूम है,15 लाख खाता में नहीं आये।"
"और?"
"भक्ति छोड़ोगे तभी तो मालूम चलेगा कि यह जूमला वाली सरकार है।"
"भाजपा के मेनिफेस्टो में और क्या था जिसे सरकार पूरा नहीं कर रही है?"
"मुझे सब मालूम है।"
"क्या था वहीं तो पूछ रहे हैं?"
"मुझे सब मालूम है भक्त मेरा टेस्ट मत करो।"
"आप कौन हैं?"
"भक्त तुमको यह भी नहीं पता मैं कौन हूँ।"
"नहीं,आप बता तो दीजिये।"
"हम नासमझ कुमार हैं।"
"वो तो उस जोकर वाले चैनल का प्रभाव पड़ गया है?"
"उसी के चलते तो हम मोदी विरोध में तर्क कर रहे हैं।"
"मतलब इसमें आपका कुछ नहीं है?"
"उससे अच्छा चैनल नहीं है भारत में,आपको मालूम है पठानकोट हमले का लाइव रिपोर्टिंग कर हमारे ज्ञान में बढ़ोतरी किया था इस चैनल ने,और तो और मेरा एक मुसलमान दोस्त खुश नजर आ रहा था।"
"वाकई।"
"भक्त तुमको मालूम भी है कि मैं बिना कुछ पढ़े ही इसी चैनल के बदौलत तर्क करने लगा हूँ।"
"अगर इन खबरिया चैनलों को बंद कर दिया जाए तो?"
"हम कुछ बोल भी नहीं पाएंगे,तर्क तो दूर की बात है,फिर मोदी का आलोचना कैसे होगा,मुझे जो पैसा मिला है उसे वापस करना पड़ेगा।"
"मतलब फंडेड लोग हैं आपलोग?"
"नहीं,मेरा मतलब यह नहीं था।"
"ठीक है,मैं तो समझ ही गया,भाजपा-नीत केंद्र सरकार जितना लोकप्रिय सरकार कोई नहीं है,आप सभी आलोचना कर नमक का कर्ज अदा कर रहे हैं।"