Monday, 14 November 2016

जन चर्चा में आज बातें गलियों से - मोदी आलोचना का सही चित्रण! - 4/4

"मोदी बहुत नाइंसाफी कर रहा है सर!"
"क्या कह रहे हो?"
"मेरे पास खाने को कुछ ही बचा है,लंबी-लंबी लाइन है और छूटे भी नहीं है।"
"2-4 दिन में ठीक हो जाएगा सब,अगर देश से भ्रष्टाचार मिटाना है तो कुछ लकलीफ तो सहना ही पड़ेगा।"
"भ्रष्टाचार से मुझे क्या? मोदी के आते ही दिल्ली में डेंगू,चिकनगुनिया का प्रकोप बढ़ गया,असहिष्णुता बढ़ गयी।"
"कौन बता दिया?"
"न्यूज वाले और कुछ नेता कह रहे थे,यहीं नहीं और भी बहुत कुछ बता रहे हैं।"
"क्या?"
"कुछ दिन पहले चर्च पर हमला हो गया था,विश्वविद्यालयों में संघ अपना पैठ जमा रहा।"
"तुमको क्या लग रहा है?"
"मैं तो एक मजदूर हूँ साहब,मुझे क्या लगेगा? जो न्यूज वाले बताते हैं वहीं सुन लेता हूँ।"
"कौन सा चैनल देखते हो?"
"वहीं बिहार वाले हैं न जो एक बार स्क्रीन काला कर दिए थे और एक दिन तो गजब हो गया था दो जोकर लाकर बैठा दिए थे,मालूम नहीं क्या कह रहे थे कि सवाल करेंगे तो नोटिस भेज देंगे तो। अच्छा मनोरंजन हुआ।"
"मतलब तुमको अच्छा लगा?"
"वो भी कोई न्यूज है साहब! इनको बताना चाहिए था कि अभी जो नोटबंदी की गयी है उससे कैसे निपटा जाए।"
"हाँ ये तो है।"
"लेकिन एक बात है साहब कि बिहार में नीतीश कुमार ने शराब बंद कर दिया।"
"मारेंगे एक थप्पड़ तुमको। कौन कह दिया कि नीतीश कुमार ने शराब बंद कर दिया,ये मोदी ने किया है।"
"नहीं सर,मोदी नहीं नीतीश कुमार ने किया है,मोदी तो बिहार का नहीं है।"
"ये तुमको कैसे समझ आ गया कि शराबबंदी को नीतीश ने किया है,मोदी नहीं।"
"सर,इतना तो समझता ही हूँ।"
"लेकिन यह नहीं समझ रहे हो कि असहिष्णुता,चर्च पर हमला,डेंगू का प्रकोप आदि मोदी ने नहीं कराया है।"
"बात तो आप सही कह रहे हैं,ये सब तो राजनीति है,इसे मोदी कैसे कर सकता है।"