Monday, 24 October 2016

यह सरासर मीडिया की गलती है -

          एक छात्र लापता हो गया है,कुछ के नजरों में जो इसके बारे में नहीं जानते,जबकि वहीं कुछ बेशर्मी से इस छात्र का इस्तेमाल कर रहे हैं,बिल्कुल उसी मामले की तरह जिसका संबंध 9 फरवरी की घटना से है।

          ऐसा ही हल्ला उससमय भी मचाया गया था कि देशद्रोह के आरोपी खालिद और अनिर्बान कहाँ हैं? जबकि वे खुद-बखुद अचानक JNU कैंपस में प्रकट हो गए थे,जाँच में मालूम चला था कि इनदोनों को यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों ने ही छुपाया है।

           इसी प्रकरण को दोहरा दिया गया है। इस आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि जिस नजीब नाम के मुसलमान छात्र का गायब होने का हल्ला फिर से मचाया जा रहा है,वह उन्हीं प्रोफेसरों के घर मिले।

           JNU की छवि मीडिया द्वारा इस तरह की बना दी गयी है कि यह पूरे भारत में अव्वल दर्जे की है,इसीकारण कई छात्र जो इस विश्वविद्यालय की एंट्रेंस एग्जाम पास नहीं कर पाते हैं अपने को हीन समझने लगते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि अन्य विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले भी कई अहम मुकाम हासिल किये हैं। इतने सरकारी खर्च होने पर भी JNU के एक प्रोफेसर विश्वविद्यालय की उपलब्धी के बारे में बताते हैं कि यहाँ से कई छात्र सिविल सेवा में पास हुए हैं।

           क्या केवल सिविल सर्वेंट तैयार करने के लिए इतना खर्च करना जरूरी है? इसके काउंटर में कोई यह सवाल करेगा कि दूसरे विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले भी यह कारनामा कर दिखाते हैं और तो और जिसने शहर नहीं देखी वो भी इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास किये हैं।

           वामपंथी संगठन जिनका पकड़ इस विश्वविद्यालय के छात्र राजनीति पर काफी है। अगर सरकार द्वारा खर्च किये गए धन की तुलना अन्य विश्विद्यालयों से किया जाए तो निहायत ही काफी ज्यादा है लेकिन ये संगठन सरकार के इस खर्च के खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे क्योंकि अपनी दुकानदारी चलाने का एक एक दुकान जो मिल गया है। ज़रा सोचिए अगर सरकार इतनी रकम किसी कल्चरल इवेंट या जागरूकता अभियान में खर्च करती है तो इन्हीं सबके द्वारा इसतरह हो-हल्ला मचाया जाता है ,लगता है मानो कितना बड़ा विपत्ति आ गया है।

           हालांकि शैक्षणिक शोध के आधार पर इनके द्वारा इस खर्च को तर्कसंगत ठहराने का प्रयास किया जाता रहा है लेकिन क्या यह सवाल नहीं उपजता कि अन्य विश्वविद्यालयों को ऐसी सुविधाएं क्यों न मिले ?
JNU कौन सा सरकार या समाज या देश के लिए कोई ऐसा मंत्र, उपाय या मिसाल ला रहा है जो सामाजिक समरसता को बढ़ाने के साथ देश की तरक्की में योगदान देता हो?

           सबसे बड़ा वजह जो छात्रों को आकर्षित करता है,वह है - लगभग मुफ्त में मिलने वाली सुविधाएं और राजनीति चमकाने का एक नया मंच।

            हाल के दिनों में क्या हो रहा है,हमसभी देख ही रहे हैं। लापता छात्र को लेकर जगह-जगह पोस्टर लगा दिए गए हैं। राजनीति का इतना घिनौना रूप हम आजतक छात्र-राजनीति में नहीं देखे हैं कि एक छात्र के जीवन पर अपना आधार मजबूत किया जा रहा हो।

            यह कहावत अब पुरानी पड़ चुकी है कि जो दिखता है राजनीति में वहीं बिकता है,अब वो बिकता है जो जमीनी स्तर पर काम करता है। लगता है संघ-भाजपा इस मर्म को समझ गए हैं,इसीलिये हर बात से इतर ये अपने काम में लगे हुए हैं ताकि सामाजिक समरसता को बढ़ाया जा सके और राष्ट्र के जड़ को मजबूत किया जा सके जिसे काटने की भरसक प्रयास किये जा रहे हैं।

             मीडिया द्वारा इतना ज्यादा तवज्जो देकर न केवल अन्य विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों को हतोत्साहित किया जा रहा है बल्कि जनता को उन तमाम खबरों से वंचित कर दिया जा रहा है जिसका ज्यादा जरुरत है।