Saturday, 7 May 2016

देश के गलत नक़्शे पर सौ करोड़ का जुर्माना और जेल -

        'द जियोस्पाशियल इंफॉर्मेशन रेगुलेशन बिल-2016' का मसौदा सरकार द्वारा जारी किया गया है। बिल के मसौदे के अनुसार सात साल की सजा का प्रावधान और एक से सौ करोड़ जुर्माना लगाने की बात कही गयी है।

अन्य जो महत्वपूर्ण बात ध्यान देने वाली है वह कि
- नक़्शे के लिए जानकारी हासिल करने और उसे साइट या ऐप के जरिये दिखाने के वास्ते सरकार से लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
- कोई भी व्यक्ति इंटरनेट या दूसरी ऑनलाइन सेवाओं पर भारत का गलत नक्शा नहीं दिखाएगा।
- कोई भी व्यक्ति उपग्रह,विमान,बैलून,ड्रोन या मानव रहित विमान(UAV) आदि के जरिये देश के किसी हिस्से की भौगोलिक तस्वीर नहीं ले पायेगा।
- अगर गूगल मैप्स,गूगल अर्थ या अन्य कोई भी एजेंसी काश्मीर या अरुणाचल को लेकर गलत नक़्शे दिखाती है तो उन पर बड़ा जुर्माना लगाया जाएगा।


नजर रखने के तरीके  -

- एक सुरक्षा प्राधिकरण बनाया जाएगा,जो इस तरह की जानकारी को नियमित कर सकेगा।
- इस प्राधिकरण का प्रमुख केंद्र में संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी होगा। इसके अन्य सदस्यों में एक राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ और एक तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होगा।

व्याख्या -

       सबसे बड़ी बात यह है कि विधेयक राष्ट्रवाद की बुनियाद को मजबूत करेगा। इन दिनों भारत में भी कुछ वामपंथी संगठनों का भारत से कोई निष्ठा नहीं रही है। ये देश तोड़ने तक की बात कर डालते हैं। नौ फरवरी के दिन जेएनयू में हुयी घटना से यह स्पष्ट हो जाता है। तदुपरांत यादवपुर यूनिवर्सिटी और कुछ अन्य जगह ऐसे ही नारों की उद्घोष प्रमाणित कर देता है। एक प्रोफ़ेसर तो बकायदा काश्मीर और अरुणाचल पर जबरजस्ती कब्जे की बात कह चुकी है। इसे देखते हुए इस आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि भारत के नक़्शे को गलत तरीके से पेश किया जाएगा।

         अपने नागरिकों से इस तरह की उम्मीदें नहीं की जा सकती कि वे राष्ट्र-विरोधी हरकत करें। इसी कारण अब तक मूल कर्तव्य को कानूनी नहीं बनाया गया है,केवल इच्छा रखी गयी है कि सभी नागरिक भारत के एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखेंगे और राष्ट्रीय प्रतीकों का आदर करेंगे।

          लेकिन वर्तमान में उत्पन्न चुनौतियों को देखते हुए 'द जियोस्पाशियल इंफॉर्मेशन रेगुलेशन बिल-2016' जैसे विधेयकों की सख्त जरुरत है। जहां समाज ऐसे देश-विरोधी तत्वों पर नैतिक जिम्मेवारी डालने में असफल रहता है,वहाँ क़ानून ही रास्ता दिखाता है और नियंत्रण रखता है खासकर राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में।

         विदेशी ताकतों की तो हमेशा से मंशा रही है कि वह भारत को अपनी पुराणी विश्वगुरु वाली शक्ति पाने से रोके। आर्थिक विकास के लक्ष्य को न पाने दे। इसीकारण किसी न किसी मुद्दे में उलझाए रखने का प्रयास करते हैं। शरारत भरा कार्य हाल में ही सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर द्वारा किया गया था जिसने भारत के नक़्शे में कुछ भाग चीन और पाकिस्तान में दिखाया था। एक तरह से यह संविधान के साथ-साथ संसद और जनता का भी अपमान है जो भारतीय सीमा का निर्धारण करता है।

        कुल मिलाकर कहा जाए तो यह विधेयक भारतीय एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने और राष्ट्रवाद की बुनियाद को मजबूत करने में कारगर सिद्ध होगा।