Monday, 4 April 2016

हिंदुत्व मजबूती की ओर और समाजिक समरसता उफान पर

        'सत्य मजबूती से अडिग रहता है,झूठ का बार-बार हमला इसमें और निखार लाता है।' ठीक ऐसा ही कुछ हिंदुत्व के साथ हो रहा है,यह सत्य है,विश्वव्यापी है,अमर है जिसपर झूठ के बदौलत बार-बार आघात और निखार ला रहा है,अपना परचम लहरा रहा है।

        'होली' एक ऐसा त्योहार है,जिसकी पहचान हिन्दू समाज से है,हिंदुत्व से है,इन दिनों इसका प्रसार समाज के हर उस समुदाय पर हो गया है,जो आज तक इससे अछूते थे,वो चाहे मुस्लिम समाज हो या ईसाई या कोई और। इसकी झलक मुझे तब देखने को मिली जब मैंने बिहार के कुछ शहरों का भ्रमण किया और रास्ते में कई प्रकार के लोगों से बात किया।

        यह होली और अन्य त्योहारों की भाईचारा का सन्देश तथा हिंदुत्व की शालीनता ही है कि हर समुदाय के लोगों को अपनी आवृत्ति में ले रहा है,जीवन का मार्ग बतला रहा है और प्रेम की विश्वव्यापी आयाम को आधार प्रदान कर रहा है।

       समय-समय पर दो आरोप हिंदुत्व पर लगाए जाते रहे हैं;पहला कि हिन्दू पद्धति भी अन्य कई धर्मों से प्रभावित हुआ है और पूरा हिन्दू समाज में एकता का भाव नहीं है-सवर्ण और अवर्ण में समाजिक तनाव बना रहता है।

        ऊपर से देखने पर यह भले ही सही प्रतीत हो,लेकिन विश्लेषण करने पर बेबुनियाद और आधारहीन लगते हैं। यह हिन्दू जीवन पद्धति की विशेषता है कि वह जड़ नहीं है,विकासशील है,समय के साथ उत्पन बुराइयों को दूर करता है जैसे कि सति-प्रथा की समाप्ति,बाल विवाह रोक आदि तथा अच्छे पहलूओं को अपनाता रहा है लेकिन अपना मूल भाव को धूमिल नहीं होने दिया है।

        वैश्वीकरण के कारण दुनिया का समस्त देश एक-दूसरे से इस कदर जुड़ गए हैं कि वहाँ के देश सांस्कृतिक स्तर पर प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। भारत में ईसाई उत्सवों को इतना तवज्जों देना इसी का नतीजा है।

       समाज हमेशा से गतिमान रहा है,परिवर्तन होते रहता है,आज परिस्थिति ऐसी बन गयी है कि आधुनिकता के बिना दुनिया में मनुष्य का अस्तित्व हीं खतरे में पड़ सकता है। आधुनिकता एक भौतिक पहलू है जो इंसान का चरित्र निर्माण नहीं कर सकता। इसी कारण हम संस्कृति की ओर लौटते हैं,जो हमारे जीवन को एक आयाम देता है। खुले तौर पर और प्रमाणित तरीके से कहा जा सकता है कि आज वहीं मनुष्य जीवित रह सकता है जिसमें आधुनिकता के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचानों का भी पुट हो। यानि कि हम सूचना प्रौद्योगिकी,अंतरिक्ष विज्ञान,खान-पान के तरीकों में बदलाव करें लेकिन अपनी सांस्कृतिक विरासत जैसे योग,मूल्य,जीने के तरीके,संस्कार आदि का भी आदर करें और अपनाएं;नहीं तो नीरसता का भाव जल्द हावी हो जाएगा।

      अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के अनुसार,'नरेंद्र मोदी आधुनिकता और परंपरा के एक अच्छे मिश्रण हैन।' ऐसे कई उदाहरण हमें मिल जाएंगे।

       दूसरी सबसे बड़ी बात ध्यान देने वाली यह है कि हम एक अलग धर्म के उत्सवों का जश्न मनाते हैं,उसका आदर करते हैं तो वह हमारी पहचान है,न कि हम उससे प्रभावित हैं।

      'सवर्ण और अवर्ण के समाजिक तनाव का मसला' आज उतना चरम पर नहीं है,जितना इसे पेश किया जा रहा है। इसपर मैं काफी लिख चुका हूँ,इसकारण वर्णन करना उचित नहीं समझता।

       स्पष्ट संकेत है कि सत्य अडिग रहता है और हिंदुत्व भी अडिग है।
         - सुरेश कुमार पाण्डेय