Monday, 26 October 2015

भूकंप : एक विश्लेषण

सुरेश कुमार पाण्डेय,
'एक सोच जो अलग हो' के लिए

भूकंप क्या है ?
भूकंप भुपटल की कंपन या लहर है जो धरातल के नीचे अथवा उपर चट्टानों के लचीलेपन या गुरुत्वाकर्षण की समस्थिति में थोड़े समय के लिये अव्यवस्था होने से उत्पन्न होती है. (An earthquake is a vibration or oscilation of the surface of the earth,caused by a transient disturbance of the elastic or gravitational equilibrium of the rocks at or beneath the surface - A.N.Strahler.)
ईस अव्यवस्था के फलस्वरुप भारी मात्रा में ऊर्जा निकलती है.ये ऊर्जा तरंगें सभी दिशाओं में गतिमान होती है.
वह स्थान जहां से ऊर्जा निकलती है वह  भूकंप का फोकस(focus,उदगम केन्द्र ) कहलाता है.इसे अवकेन्द्र(hypocentre) भी कहा जाता है.ये तरंगें अलग अलग दिशाओं में चलती हुयी पृथ्वी के सतह पर पहुंचती है.भूतल पर वह बिंदु जो फोकस के समीपतम होता है,अधिकेंद्र(epicentre) कहलाता है.यहीं पर सबसे पहले तरंगों को महसूस किया जाता है,यह फोकस के ठिक उपर समकोण पर होता है.
भूकंप आने के कारण -
पृथ्वी के अंदर कई प्रकार की प्लेटे होती है जो संचरन करती रहती है.मूल रुप से भूकंप का कारण इन प्लेटो के बीच की समस्थिति(equilibrium) में हुये अचानक बदलाव होता है.
इन प्लेट संचरन के फलस्वरुप तीन प्रकार की प्लेट सीमायें बनती है -
1.अपसारी सीमा (divergent boundaries) - जब प्लेटे एक दूसरे से विपरित दिशा में अलग हटती है.
2.अभिसरण सीमा (convergent boundaries) - जब एक प्लेट दूसरे प्लेट के नीचे धंसती है और जहां भूपर्पटी(crust) नष्ट होती है.
3.रुपांतर सीमा(transform boundaries) - जहां न तो नई पर्पटी का निर्माण होता है और न विनाश होता है.ये प्लेट एक दूसरे के साथ सरक जाती है.
इसके अलावा भी भूकंप आने के कई कारण है - 
1.ज्वालामुखी क्रिया (volcano)
2.भूपटल भ्रंश (faulting)
3.भूसंतुलन में अव्यवस्था (isostatic disturvance)
4.प्लेट टेक्तानिक सिद्धांत (plate tectonic theory)
हिमालय क्षेत्र में ज्यादा भूकंप क्यों आते हैं ?
जहां पर आज हिमालय है वहां काफ़ी समय पहले टेथिस नाम का एक समुद्र हुया करता था.दो प्लेतों के तकराने के फलस्वरुप वहां आज के हिमालय का निर्माण हुया.
चुकी ईस पूरे क्षेत्र में पर्वत निर्माण की प्रक्रिया अभी तक पुरी नहीं हो पायी है,ईसकारण यहां संतुलन की प्रक्रिया अभी पुरी नहीं हुयी है.ईस अस्थरता और अव्यवस्था के कारण ईस क्षेत्र में विनाशकारी भूकंप आते रहते है.यह भारत का सबसे बड़ भूकंप क्षेत्र है.
प्लेट संचरण के दृष्टिकोण से देखा जाये तो कारण है - एशियन और भारतीय प्लेट के टकराव,इन प्लेटो को टकराने के बाद सीमायें टूटती है और भारी मात्रा में ऊर्जा बाहर निकलती है.
भूकंप का वितरण -
1.प्रशांत महासागरीय तटीय पेटी( Circum pacific Belt )
2.मध्य महाद्विपीय पेटी (Mediterrian belt)
ये वे क्षेत्र है जो भूकंप के लिये काफ़ी संवेदनशील है.
भूकंपीय आपदा से होने वाले प्रभाव -
1.भूमी का हिलना,
2.धरातलीय विसंगती,
3.भू-स्खलन,
4.धरातल का एक तरफ़ झुकना,
5.हिमस्खलन,
6बांध के टूटने से बाढ,
7.आग लगना,
8.जान माल की हानि,
9.इमारतों का टूटना,
10.सुनामी (सबसे खतरनाक प्रभाव,अगर epicentre समुद्र में हो)
क्या करें,जब भूकंप आ जाये -
1.घबड़ाये नहीं,और तेजी से न भागे,
2.उंच्ची इमारत,पेड़,बिजली के खंभे आदि से दुर रहे,
3.अगर उपर की इमारत में है तो लिफ़्ट का इस्तेमाल न करें,
4.अगर घर,मौल,आदि से निकलना संभव न हो तो कमरे के कोनों में चले जाये और मजबूत चीज को पकड़ ले या table के नीचे छिप जायें.
By - suresh kumar pandey