Monday, 4 May 2015

वैवाहिक बलात्कार (marital rape)

गृहमंत्री हरिभाई पारथीभाइ चौधरी ने संसद में बयान दिया कि " भारत में
वैवाहिक बलात्कार की अवधारणा को लागू नहीं किया जा सकता जहां शादी को पवित्र बंधन माना जाता है."
जिस कारण यह बहस का मुद्दा बन गया है,इसके पक्ष और विपक्ष में लोग काफ़ी मजबूत तर्क पेश कर रहे हैं जिसका विश्लेषण करना बहुत जरुरी है.
क्या भारत में वैवाहिक बलात्कार को अपराध माना जाये ?
                       1.
" भारत तैयार है लेकिन संसद नहीं ."
16दिसंबर की बहुचर्चित बलात्कार कांड के बाद गठित 'जेएस वर्मा समीति' वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाने की सिफ़ारिश कर चुकी है लेकिन सरकार ने उस वक्त स्वीकार नहीं किया था.
ईस मुद्दे पर समाज और विद्वान बंटे हुये हैं -
कुछ का मानना है - " कानून से छेड़छाड़ करने की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि इसका दुरुपयोग हो सकता है."
आज महिलाओं द्वारा पतियों और ससुराल के लोगों को झूठा फंसाये जाने के काफ़ी अधिक उदाहरण सामने आ रहे हैं.यह सामाजिक स्थिरिता के लिये खतरनाक होगा.
जबकि इसका समर्थन करने वाले कहते हैं - UNO के एक रिपोर्ट " The 2011 Progress of the world's woman : The persuate of justice " के अनुसार अमेरिका,आस्ट्रेलिया सहित दुनिया के 52 देशों में 'वैवाहिक बलात्कार' अपराध है.
जब घरेलू हिंसा से महिलाओं को बचाने के लिये कानून है तो वैवाहिक बलात्कार के लिये क्यों नहीं होना चाहिये ?
सबसे बड़ा सवाल है - " यह कैसे साबित होगा कि यौन संबंध बनाते समय किसी महिला की सहमती थी या नहीं ?"
अगर कोई महिला ईस तरह का आरोप लगा रही है और उसका पति उसके मना करने के बाद भी वैवाहिक बलात्कार जैसी हरकत कर रहा है तो उससे तलाक लेने का पुरा अधिकार महिला को है.यह किसी
वैवाहिक दंपती का निजी मसला है,इसे सार्वजनिक करने से क्या फ़ायदा ?
लेकिन सवाल यहां फ़िर से खड़ा हो जाता है कि " केवल महिलाओं से संबंधित मुद्दों को ही दुरुपयोग के लिये संवेदनशील के रुप में क्यों देखा जाता है?महिलाओं को इसका अधिकार क्यों नहीं मिलना चाहिये?
हमारी व्यवस्था को दुरुपयोग से निपटने में सक्षम होना चाहिये,अगर ऐसा नहीं हो सकता है तो यह व्यवस्था की विफलता है."
                          2.
आईपीसी(IPC) की धारा 375 जो बलात्कार(rape) को परिभाषित करती है,यह वैवाहिक बलात्कार के मामले में एक अपवाद प्रदान करती है - "किसी व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी,जिसकी उम्र 15 साल से कम न हो यौन संबंध बनाना बलात्कार नहीं है."
जेएस वर्मा कमीटि ने इसी प्रावधान में संशोधन की बात कही थी.आज महिला संगठन और कुछ NGO जो महिला अधिकार की रक्षा का बात करते हैं वे इसी को बदलने की बात कह रहे हैं.
                        3.
conclusion -
अगर वैवाहिक बलात्कार को अपराध बना दिया जाता है तो इसके कई दुरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे जो खतरनाक भी हो सकते हैं -
a)भारत की अधिकांस महिलायें जीवन पर्यंत अपने पति पर आश्रित रहती है,अगर वह किसी सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य के कहने पर ईस मामले को लेकर अदालत जाती है तो कोई भी पति इसे बर्दास्त नहीं करेगा,दोनों के बिच तलाक होना निश्चित हो जायेगा.जिसकारण निम्न प्रभाव उत्पन्न होंगे - पहली सामाजिक स्थिरता होने का डर हमेशा सताते रहेगा और दूसरा महिला का जीवन और गर्त में चला जायेगा क्योंकि भारतीय समाज अभी उतना परिपक्व नहीं हुआ है कि वह किसी अकेली शादीसुदा महिला पर चारित्रिक लांछन नहीं लगाये.
b)शादी एक संस्था है जिसे सामाजिक मान्यता प्राप्त होती है अगर पति को वैवाहिक बलात्कार के मामले में अपराधी बनाने की कोशिश पत्नि द्वारा की जायेगी तो हम तेजी से उस समाज की ओर अग्रसर होंगे जो पश्चिमी सभ्यता की देन है.अगर ऐसा हो गया तो हमारी बुनियाद ही हिल जायेगी जिसे हम सदियों से संजोकर रखे हुये है.
c)एक व्यावहारिक अनुभव है - शादी के बाद पति और पत्नि एक दूसरे से ईस कद्र जुड़ जाते हैं कि उनमें एक सामान्य(comman) समझदारी पनप जाती है,ये एक-दूसरे की इच्छा और अनिच्छा का इज्जत करने लगते हैं.
जिस कारण उनके बिच वैवाहिक बलात्कार जैसी कोई भी घटना होने की संभावना कम है.
     by - suresh kumar pandey