Tuesday, 21 April 2015

Net neutrality (नेट निरपेक्षता ) :एक विश्लेषण :-

सुरेश कुमार पाण्डेय,
'एक सोच जो अलग हो' के लिए

भारत में इन दिनों यह बहस का मुद्दा बना हुया है.मिडिया भी इसको लेकर काफ़ी सक्रिय नजर आयी,जो एक अच्छी पहल है."net neutrality" शब्द को चर्चा में रहने के दो कारण हैं -
a)एयरटेल द्वारा 'एयरटेल ज़ीरो' का प्रस्ताव लाना.जिसको लेकर लोग अपनी विरोध TRAI के सामने दर्ज करा रहे हैं और माध्यम बना - email,sms और पत्र.दबाव में आकर 'फ्लिपकार्ट' ने एयरटेल ज़ीरो से नाता भी तोड़ लिया जो online व्यापार करती है.
b)दूसरा कारण है - भारतीय दुरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) द्वारा इसी साल march के आखिर में ' over the top servive ' पर एक चर्चा पेश की थी.
Net neutrality क्या है -
'एयरटेल ज़ीरो' द्वारा जो प्रस्ताव लाया गया था, उसके तहत उपभोक्ताओं को 'डाटा पैक ' के लिये तय समय सीमा तक पैसा अदा करने के बाद उन websites के उपयोग के लिये अलग से पैसा देना पड़ता,जो कंपनी के करार के दायरे में नहीं.
इसको हम निम्नलिखित उदाहरण से समझ सकते है - फ्लिपकार्ट का जो समझौता एयरटेल से था,उसके कारण किसी उपभोक्ता द्वारा उसकी सुविधा उसके डाटा पैक में गिनी जायेगी .लेकिन अगर वह किसी दूसरे website का यूज करते हैं तो उन्हें अलग से रकम अदा करनी होती या उसकी बेहद धीमी गति से समझौता करना पड़ता.
इससे Net neutrality का अर्थ निकलता है - Internate पर मौजूद सारी websites और सामाग्री का एक ही शुल्क में इस्तेमाल करना.
Net neutrality के पक्ष में तर्क -
1.यह एक बंदिश है,जिसमें खास अवधि और डाटा के लिये रकम चुकाने के बावजूद इंटरनेट उपयोग के लिये कोई उपभोक्ता संबंधित कंपनी के रहमोकरम पर निर्भर हो जाये.एक तरफ़ कंपनी डाटा पैक के लिये उपभोक्ता से कीमत वसुलती है और फ़िर किसी वेबसाइट कंपनी से सौदा करती है.जो दोहरी मुनाफा को दिखाता है.
2.अमेरिका,ब्राजील और नीदरलैंड जैसे कई देशों में "Net neutrality" लागू है.
3.कई तरह की बुनियादि जानकारी आज बहुत जल्द इंटरनेट के माध्यम से प्राप्त हो जाती है,जैसे - educational sites,social media,recepee site,blogs,you tube video,free app site,online marketing,result,online shopping,online chatting,talking.
ये सभी जरुरतें आज इंसान का अंग बन गया है.अगर अलग से कोई कीमत ली जाती है तो उपभोक्ताओं पर बोझ काफ़ी बढ जायेगा.
Net neutrality के खिलाफ़  तर्क -
1.टेलीकाम कंपनी ने दलील दी है कि Skype,whats app,massenger जैसे नई तकनीक की वजह से इंटरनेट के जरिये बात करने या संदेश भेजने के चलते उनके व्यवसाय पर काफ़ी नकरात्मक असर पड़ा है.
2.European union का मानना है कि Net neutrality बुनियादि सुविधाओं में निवेश को बाधित करती है.
3.Net neutraliry को अस्वीकार करने वालों लोगों का ये भी कहना है कि "टेलीकाम क्षेत्र में अगर अलग-अलग मूल्य की व्यवस्था पहले से ही लागू है.केबल सेवा में भी यह लागू है.अंतराषट्रीय call महंगी है,तो फ़िर डाटा के लिये ऐसा क्यों न हो?इसके अलावा इसके बुनियादि ढाँचा में निवेश को भी प्रोत्साहन मिलेगा.
अगर लाभ-हानि से उपर उठकर सोचे तो कई प्रश्न सामने आते हैं -
1.केबल सेवाओं में हमें Neutrality की जवाबदेही क्यों निभानी है ?जब Net neutrality पर बहस के लिये तैयार हैं तो केबल सेवाओं पर क्यों थोपा जा रहा है?
2.अगर application(ऐप) के पहुंच से एकाधिकार पैदा होती है तो neutrality समाप्त करना उचित नहीं है क्या ?
3.DTH के तर्ज पर प्राथमिकता वाली पहुंच का विचार कैसा है ?
निष्कर्ष (conclusion) -
1.ये बात सही है कि 2013 की तुलना में 2014 में डाटा उपयोग दुगुनी हुयी है.लोग skype,whats app आदि का उपयोग कर रहे हैं.लेकिन एक सर्वे से मालूम चला है कि नेटवर्क प्रोबलम के कारण आवाज का सही तरीके से नहीं आने के चलते और बिच में ही disconnect हो जाने के कारण लोग फ़िर से वापस call पर लौट रहे है.
2.हमारे यहां इंटरनेट की गति से लेकर इसके लिये वसूली जाने वाली राशि तक के मामलों में शिकायतें छिपी हुयी है.
3.नेट का केबल के साथ तुलना करने का कोई औचित्य नहीं है.केबल सेवा प्रदाताओं की संख्या ज्यादा नहीं है इसके उलट net neutraliry खत्म होने के बाद उपभोक्ताओं पर लागत का बोझ बहुत अधिक पड़गा.
इसके अलावा इंटरनेट पर मौजूद सूचना भी प्रसारकों और चैनलों की तुलना में बहुत ज्यादा है. ये सभी वजहें इंटरनेट को खुला और मुक्त रखने के लिये पर्याप्त है.