Monday, 27 April 2015

बधाई हो बेटी हुयी है !

सुरेश कुमार पाण्डेय,
'एक सोच जो अलग हो' के लिए

2015 की गणतंत्र दिवस की झांकी में जब " बधाई हो बेटी हुयी है " नाम आंखों के सामने आयी तो सभी के दिलों को छू गयी.
यह झांकी 22 जनवरी,2015 को हरियाणा के पानीपत से प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गयी " बेटी बचाओ,बेटी पढाओ अभियान " से प्रेरित थी.ईस अभियान को हरियाणा से शुरू करने का उद्देश्य है - वहां पर बाल लिंगानुपात (0-6 आयु वर्ग ) मात्र 879 है जो राष्ट्रीय औसत 919 से काफ़ी कम है.
                     1.
भारत में महिलाओं की दुर्दसा का आंकड़ा और वास्तविक्ता :-
- महिलाओं की स्थिति के बारे में एक सर्वे में भारत का स्थान 135 देशों में 105वां है.
- India's girl पर 'save the child report,2014' के मुताबिक
a)18 साल से कम उम्र की बेटियों की संख्या = 22.5 करोड़
b)निजी स्कूल में लड़कियों की संख्या = 45% और लड़कों की 55% है (ईस 10% के अंतर को पाटना सरकार और समाज के लिये बेहद कठिन चुनौती है)
c)70% लड़कियां 10वीं तक जाते जाते पढाई छोड़ देती है,41% 8वीं तक,24% 5वीं तक पहुंचते-पहुंचते घर बैठ जाती है.
6% तो upper प्राइमरी में ही drop हो जाती है.
- एक चौंकाने वाला तथ्य है,
2012 में शिक्षिकायों की संख्या मात्र 31.6% हो गयी है जो 2001 में 38% थी.
इसका मुल कारण छेड़छाड़,बलात्कार और प्रताड़ना को बताया जा रहा है.
यह एक विडंबना ही है कि जब हम धन,विद्या और शक्ति आदि की कामना करते समय लक्ष्मी,सरस्वती और दुर्गा नामक स्त्री की कामना करते हैं,लेकिन जब संतान की चाहत रखते हैं तो ऐसा क्यों नहीं होता ?
भारत में बाल लिंगानुपात 2001 के 927 के अपेक्षा 2011 में घटकर 919 हो गयी लेकिन संपूर्ण लिंगानुपात 933 से बढकर 943 हु गयी.ईस तरह बाल लिंगानुपात का घटना एक चिंता का विषय है.भ्रुण हत्या को इसके लिये जिम्मेदार माना जाता है जो दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों से प्रेरित है.
                      2.
इन सभी बातों को ध्यान में रखकर ही प्रधानमंत्री द्वारा " बेटी बचाओ,बेटी पढाओ अभियान " की शुरुआत की गयी है,जिसकी मुख्य विशेषता और उद्देश्य है -
a)बालिका जन्मोत्सव मनाना और उसे शिक्षित करना,
b)लिंग चयन वाले लेंगिक पुर्वाग्रह का समापन,
c)लड़कियों की बचाव और सुरक्षा सुनिश्चित करना,
d)बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करना.
अभियान लागू करने की नीति -
a)बालिका जन्म पर खुशी और उत्सव मनाना,
b)अपनी बेटियों पर गर्व करना और पराये धन की मानसिकता का विरोध करना,
c)लिंग समानता को बढावा देना,
d)बाल-विवाह और दहेज प्रथा का विरोध करना,
e)लड़कियों को स्कूल में दाखिला कराना,
f)लिंग आधारित पुरानी सोच को चुनौती देना.
                        3.
निष्कर्ष (conclusion) -
ईस योजना की सद्भावना राजदूत माधुरी दीक्षित को बनाया गया है.यद्यपी इसमें कई मंत्रालय की भागिदारी है,लेकिन महिला एवं बाल विकास इसकी नोडल मंत्रालय है.
यह स्कीम अभी चुने हुये 100 जिलों में चलायी जा रही है.इसके तहत महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थलों पर गुड्डी- गुड्डा बोर्ड के द्वारा जन्म से संबंधित बालक बालिका आंकड़ों को दर्शाया जायेगा और जन्म के समय लिंगानुपात का विवरण प्रचारित किया जायेगा.
स्कीम को सफल बनाने के लिये निम्नलिखित उपाय अपनाने की जरुरत है -
-लिंग जांच (सोनोग्राफी) पर रोक,
-लड़कियों के जन्म पर उत्सव मनाने की जरुरत,
-अभियान को केवल लड़की केंदित नहीं बनाया जाना चाहिये,इससे पुरुषों को भी जोड़ने की जरुरत है,
-इसे जनअभियान के रुप में अपनाने के लिये प्रोत्साहित करने की जरुरत है.