Wednesday, 22 April 2015

'गोडसे' शब्द अब असंसदीय नहीं रहा

सुरेश कुमार पाण्डेय,
'एक सोच जो अलग हो' के लिए

1948 में नाथूराम गोडसे नेमहात्मा गांधी की हत्या कर दी थी.जिस कारण 1956 में उपसभापति सरदार हुकुम सिंह के निर्देश पर ईस शब्द पर पाबन्दी लगी थी.उन्होनों यह आदेश तब दिया था जब राज्य पुनर्गठन बिल पर बहस के दौरान दो सांसदों ने नाथूराम गोडसे का महिमामंडन किया था.हाल ही में जब संसद के शीत सत्र में माकपा नेता पी राजीव ने हिंदू महासभा द्वारा नाथूराम गोडसे की प्रतिमा स्थापित करने का मामला उठाया तो राज्यसभा के उपसभापति पीजे कुरियन ने
गोडसे शब्द को असंसदीय होने की बात कही थी.जिसकारण शिवसेना सांसद हेमंत तुकाराम गोडसे काफ़ी आहत हुये थे.इन्होंने लोकसभाध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर खेद जताया था.
महाराष्ट्र के एक खास इलाके में ईस समुदाय की संख्या ज्यादा है जो अपने आप को अपमानित महशुस कर रहे थे.
लेकिन अब लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने यह व्यवस्था दी है कि ' नाथूराम गोडसे ' के बारे में उल्लेख को छोड़कर ' गोडसे ' शब्द अब असंसदीय नहीं है.