Friday, 17 April 2015

कृषि ऋण की समस्या और समाधान

सुरेश कुमार पाण्डेय,
'एक सोच जो अलग हो' के लिए

पिछले एक दशक में कृषि के लिये संस्थागत ऋण में काफ़ी तेजी आयी है लेकिन इसका लाभ किसानों को नहीं मिला है.ईस लाभ को उन लोगों ने उठाया है जो कृषि संबंधी गतिविधियों से जुड़े है अर्थात कृषि कारोबारी और कंपनी.
यह, आरबीआई(RBI) के आंकणों पर TATA INSTITUTE OF SOCIAL SCIENCE के शोध से प्रमाणित हो जाता है.इस शोध में पाया गया है-
1.कुल कृषि ऋण का 30% से भी कम बैंको के ग्रामिण शाखाओं द्वारा दिया जाता है जबकि शेष 70% ऋण माहानगरीय और शहरी शाखाओ द्वारा दिया जाता है.
2.कई ऋण का आकार तो 1 करोड़ से भी ज्यादा है लेकिन इनकी पहुंच उन सीमांत किसानों तक नहीं है जिनके पास एक हेक्टेयर से भी कम जमीन है.
यह तथ्य Dec 2013 में आया NSSO के ऋण और निवेश सर्वेक्षण संबंधी रिपोर्ट से भी स्पष्ट हो जाता है.इसके अनुसार ग्रामीण परिवारों के कुल बकाया ऋणों का 44% असंगठित क्षेत्र के हैं और बाकी 33% साहुकारों से लिया गया ऋण है.
देश के 80% छोटे और सीमांत किसान आज भी वित्तीय जरुरतों के लिये असंगठित क्षेत्र के पास जाने को मजबूर है.
भारत में कृषि ऋण के दो स्त्रोत है-
a)गैर संस्थागत स्त्रोत - साहुकार,जमींदार,बड़े व्यवसायी आदि
b)संस्थागत स्त्रोत - वाणिज्यिक बैंक,सहकारी बैंक,सरकारी बैंक आदि
लेकिन आज भी अधिकांश किसान गैर संस्थागत स्त्रोत पर ही निर्भर है.इसका मुख्य कारण है बैंकों का ग्रामीण क्षेत्र तक विस्तार का न होना.
सरकार और आरबीआई(RBI) द्वारा इन  परेशानियों को दुर करने के लिये कई कदम उठाये गये हैं -
1. कृषि क्षेत्र के संस्थागत ऋण में वर्ष 2004 से ही तेजी देखने को मिली है जब यूपीए सरकार ने 3 वर्षों में उसे बढाकर दोगुना करने का फ़ैसला किया.यह लक्ष्य तो हासिल हो गया लेकिन कृषि ऋण के लिये वार्षिक लक्ष्य हर साल बढता गया.2015-16 में तो यह 8.5 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को छू गया.(economic survey 2015-16)
2. 2012 में RBI ने यह निर्देश दिया है कि बैंको द्वारा दिये जाने वाले कुल ऋण का 4.5% कृषि क्षेत्र को दिया जायेगा.
3.सरकार द्वारा ये भी कहा गया है कि जो किसान समय पर अपने ऋण का भुगतान कर देंगे उन्हें 3% की रियायत वार्षिक दर में मिलेगी.
4.सरकार द्वारा KCC SCHEME(किसान क्रेडिट कार्ड योजना) को 1998 से चलाया गया है,जिसके तहत किसानों को वाणिज्यिक बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक  से ऋण उपलब्ध कराया जाता है.