Saturday, 18 April 2015

इतिहास की समझ - 3, "घर वापसी जिसने बदल दी भारत की इतिहास"

सुरेश कुमार पाण्डेय,
'एक सोच जो अलग हो' के लिए

1915 में एक भारतीय बैरिस्टर ने दक्षिण अफ़्रीका के अपने करियर को त्याग अपने देश वापस आने का फ़ैसला किया.जब मोहनदास करमचंद गांधी मुंबई के अपोलो बंदरगाह में उतरे तो न वो महात्मा थे और न ही बापू.फिर भी न जाने क्यों बहुतों को उम्मीद थी कि ये शख़्स अपने ग़ैर-परंपरागत तरीकों से भारत को अंग्रेज़ों की ग़ुलामी से आज़ाद करा लेगा.उन्होंने भारतवासियों को निराश नहीं किया. इसे इतिहास की विडंबना ही कहा जाएगा कि जब गांधी भारत लौटे तो एक समारोह में उनका स्वागत किया था बैरिस्टर मोहम्मद अली जिन्ना ने.दोनों बाद में अपने अपने देश के राष्ट्रपिता काहलाये.
एक स्वागत समारोह की अध्यक्षता फ़िरोज़ शाह मेहता ने की थी तो दूसरे समारोह में एक साल पहले जेल से छूट कर आए बाल गंगाधर तिलक मौजूद थे.
एक समारोह में जब गांधी की तारीफ़ों के पुल बांधे जा रहे थे तो उन्होंने बहुत विनम्रता से कहा था, "भारत के लोगों को शायद मेरी असफलताओं के बारे में पता नहीं है. आपको मेरी सफलताओं के ही समाचार मिले हैं. लेकिन अब मैं भारत में हूं तो लोगों को प्रत्यक्ष रूप से मेरे दोष भी देखने को मिलेंगें. मैं उम्मीद करता हूं कि आप मेरी ग़लतियों को नज़रअंदाज़ करेंगे. अपनी तरफ़ से एक साधारण सेवक की तरह मैं मातृभूमि की सेवा के लिए समर्पित हूं."
इसके बाद गांधी ने गोखले की सलाह का पालन करते हुए पहले भारत के लोगों को जानने की कोशिश शुरू की. उन्होंने तय किया कि वो पूरे भारत का भ्रमण करेंगे और वो भी भीड़ से भरे तीसरे दर्जे के रेल के डिब्बे से.
गांधी के एक और जीवनीकार लुई फ़िशर लिखते हैं कि लोगों के छूने से उनके पैर और पिंडली इतनी खुरच जाती थी कि वहां पर गांधी के सहायकों को वैसलीन लगानी पड़ती थी.
बाद में उनकी अंग्रेज़ साथी मेडलीन स्लेड ने, जिन्हें गांधी मीराबेन कहा करते थे ने कुछ पत्रकारों को बताया कि वो खुद गांधी के पैरों को हर रात शैंपू से धोया करती थीं.
भारत में गांधी के प्रयोग और आंदोलन :-
1.1916 के कांग्रेस अधिवेशन में वो पहली बार जवाहरलाल नेहरू से मिले. वहीं बिहार से राज कुमार शुक्ल आए हुए थे.
उन्होंने गांधी को चंपारण के नील पैदा करने वाले किसानों की व्यथा बताई और किसी तरह उन्हें वहां आने के लिए राज़ी कर लिया.
यह उनका भारत में सत्याग्रह से संबंधित पहला प्रयोग था.जिसे 1917 के चंपारण सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है.यह प्रयोग सफल हुया और अंग्रेजों को तीनकठिया प्रथा को समाप्त करना पड़ा.
2.इसके साथ ही इनके प्रयोग का सिलसिला भारत में चल पड़ा.1918 में गांधी ने मिल मजदूरों के हड़ताल के समर्थन में भूख हड़ताल की और खेड़ा में "कर नहीं आंदोलन "चलाया.
3.अंग्रेजों द्वारा 19 march,1919 को रौलट एक्ट लागू किया गया,इसके तहत किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता था लेकिन इन्हें बचाव का कोई अधिकार नहीं था.इसके विरोध में 6 april ,1919 को गांधी ने देशव्यापी हड़ताल करवायी.13 April,1919 को जालियाँवाला बाग कांड हुया.1000 से ज्यादा लोग मारे गये और गांधी ने " कैसर-ए-हिंद" की उपाधी लौटा दी.परंतु अंग्रेज झुकते नजर नहीं आ रहे थे फलस्वरुप इन्होनों 1 august,1920 को असहयोग आंदोलन प्रारम्भ किया.
4.अब आंदोलन की एक सिलसिला सी चल पड़ी.सविनय आंदोलन,भारत छोड़ों आंदोलन और इनकी आमरण अनशन ने भारत को भाग्य वधू से मिलन 15 august,1947 को करवा दिया.
1915 में इनके भारत आगमन और कांग्रेस से जुड़ने के बाद पुरी भारत का इतिहास ही अपनी करवट बदल ली.चारों तरफ़ गांधी की धूम मच गयी और लोग इन्हें मशीहा समझने लगे.
गांधी से संबंधित एक विवाद जो पूरे भारत में प्रचलित है - इन्होनों ने भगत सिंह को बचाने का कोई प्रयास नहीं किया.जिस कारण इनको निर्धारित तिथि से पूर्व ही फांसी दे दी गयी.यह तथ्य अब भी ब्रिटिश राज्य के दस्तावेजों में मौजूद है कि वे गांधी से भयभीत थे कि कहीं फ़िर वे अनशन शुरू न कर दे और इसलिये इन्होनों महात्मा के पत्र का उत्तर देने से पूर्व ही फांसी दे दी.
अगर प्रो. इरफान हबीब के बातों पर गौर किया जाये तो ,"गांधी इतिहास का विषय नहीं है."
अंत में हम गांधी के ही विचार को बतायेंगे जो उन्होनों अपनी पुस्तक " my experiments with truth (1929)" में कहा है - "गांधीवाद नाम की किसी विचारधारा का कोई अस्तित्व नहीं है,यह कोई वाद नहीं है बल्कि जीवन का एक अंग है."
हम गांधी को तब तक नहीं समझ सकेंगे जब तक गांधीवाद के तरीकों को अपने जीवन में नहीं उतारेंगे और उसपर अमल नहीं करेंगे.
source - 1.Political thought - Jp sud,op gauba
            2.modern india - Vipin chandra,sumit sarkar,ncert
           3.freedom struggle - Vipin chandra
            4.bbc,jansatta hindi news paper
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"गांधीवाद की आज के समय में प्रासंगिकता "
          By - सुरेश कुमार पान्डेय (suresh kumar pandey)