Saturday, 21 March 2015

इतिहास की समझ

सुरेश कुमार पाण्डेय,
'एक सोच जो अलग हो' के लिए

A person who hates history,can never create history....
                           by ishita shah
इतिहास हमेशा से विवाद का विषय रहा है खासकर इसे समझने को लेकर,कई विद्वान और छात्र खासकर आम लोग शब्दों के अर्थ को न समझ पाने के कारण अपने जीवन में उल्टी सीधी निर्णय लेने लगते हैं ठीक एसी हिं हरकत भी करने लगते हैं.
अभी कुछ दिन पहले हमारे एक मित्र ने एक दूसरे व्यक्ति द्वारा बाल गंगाधर तिलक को संप्रदायिक कहने पर क्रोधित हो गये,लेकिन यहा समझने वाली बात है कि उसके कहने का परिप्रेक्ष्य क्या था ?
इतिहास का इतिहास :-
यह बात थोड़ा सुनने में अजिब लगे लेकिन  किसी भी विषय को समझने में इसका महत्वपूर्ण स्थान रहा है.
"प्रत्येक विषय का अपना एक इतिहास होता है."
फ्रीमैन के विचारों को देखा जाये तो,हमें राजनीति और इतिहास का एक दूसरे से स्पष्ट संबंध मिलता है, " इतिहास अतीत की राजनीति है;राजनीति वर्तमान का इतिहास है "
क्रांति के विषय पर अरस्तू के विचार को कईयों द्वारा आदर्श माना गया है और इसी को आधार मानकर नये सिधान्तों की रचना की गयी है.कार्ल मार्क्स और मूर के विचार तो क्रांति मे चार चांद लगा देते है.इतिहास का चरमोत्कर्ष मार्क्स के विचारधारा में हिं पाया जाता है,जिनके एतिहासिक भौतिकवाद (historical mate rialism)(इसे dialectical materialism भी कहा जाता है) ने इतिहास को काफ़ी ऊंचा स्थान प्रदान कर दिया.इसकी एक कथन है
       आज के दिनों में इतिहास लेखन की मुख्य समस्या रही है - इतिहास को ऊपर से देखकर लिखने की परंपरा अर्थात अभीजन वर्ग (elite class) द्वारा किये गये कार्यों को बढा चढाकर दिखाने की कोशिश करना.जो खासकर सम्राज्यवादी और भारतीय राष्ट्रवादी इतिहासकारों की विशेषता रही है.
अगर "इतिहास को नीचे से देखने" की दृष्टिकोण का विकास कर लिया जाये इसी तरीके से लिखने का प्रयास हो तो उन वंचित तबके और किसान तथा मजदूर के योगदान की भी सही समीक्षा की जा सकती है.भारतीय इतिहास लेखन की एक बुनियादि दोष रहा है,नरम और गरम दल के संघर्ष के बिच वंचित समुह के योगदान पर प्रकाश डालने को लेकर न्याय नहीं हुया है.
इतिहास को समझने को लेकर कई और समस्यायें भी सामने आती है,
1.शब्दों का अर्थ,शब्दों का अर्थ समय के साथ काफ़ी बदल जाता है और लोगों द्वारा मूल से भिन्न समझा जाने लगता है.जैसे - हिंदु शब्द का प्रयोग इरानियों द्वारा सबसे पहले उन लोगों के लिये किया गया जो indus river के किनारे रहते थे लेकिन बाद में ईस शब्द का मतलब हिं बदल गया और एक धार्मिक अर्थ ले लिया,शब्द हिन्दुस्तान का इस्तेमाल तो पूरे भारत के लिये किया जाने लगा(source - THE WONDER THAT WAS INDIA BY A L BASHAM; अदभुत भारत,pg-3),इसी तरह कई शब्दों के अर्थ बदल गये है इतिहास पढते समय ऐसी सावधानी बरतनी जरुरी हो जाती है.
2.स्त्रोत्र की अनुलब्धता और प्रमाणिकता,इतिहास को समझने के लिहाज से यह एक विशेष समस्या है.
3.इतिहासकारों का पूर्वाग्राहों से ग्रसित होना,ईस समस्या के निदान है कि इतिहासकार पहले हिं इससे अवगत करा दें.

यह बात हम जानते है कि इतिहास को पढे बिना हम अपनी आधार को मजबूत नहीं बना सकते,अगर रुसो के विचार को याद किया जाये तो खुद ब खुद साबित हो जाता है, " जो इंसान अपने वर्तमान और भविष्य के बारे में नहीं सोचता वह अवारा है,और ये सभी जानते हैं कि इसकी बुनियाद अतीत हिं है,अतीत को जाने बिना वर्तमान की और भविष्य की रुपरेखा हम नहीं तय कर सकते. "
           जो इंसान इतिहास से नफ़रत करता है,वह अपनी खुद का इतिहास नहीं बना सकता,अपनी खुद का इतिहास बनाने के लिये जरुरी है कि इतिहास समझने की समझदारी विकसित किया जाये.