Sunday, 22 March 2015

भूमि अधिग्रहन : मिथक,समस्या और समाधान - 1

सुरेश कुमार पाण्डेय,
'एक सोच जो अलग हो' के लिए

नये विधेयक 2015 का सिध्दान्तिक पहलू और 2013 के कानून से तुलनात्मक अध्ययन :-
1.उन 13 कानुनों को शामिल कर दिया गया है,जो 2013 के land law में शामिल नहीं थे.जैसे - national highway act,1956; The railway act,1989.
यह नये बिधेयक की सबसे अच्छी और positive पहलू है.
2.यह भूमि के उपयोग को 5 भागों में बांटता है,
          (i) defence,
         (ii) rural infrastructure,
        (iii) affordable housing,
        (iv) industrial corridors, and
        (v) infrastructure projects         including Public Private Partnership (PPP) projects where the government owns the land. 
ईस प्रावधान को लेकर समाज के कुछ वर्गों और कुछ राजनीतिक दलों में विरोध के स्वर दिखायी दे रहे है,परंतु वास्तविकता क्या है ईसकी पड़ताल करना बहुत जरुरी है.कुछ लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि अधिग्रहन की सारी शक्तियां सरकार के हाथों में चली गयी है और तर्क दे रहे हैं कि ये पांचों category लगभग सभी प्रकार के
अधिग्रहन को अपने में समेट लिया है.
2013 का कानून अधिग्रहन के लिये निम्नलिखित प्रावधान करता था - "the consent of 80% of land owners is obtained for private projects and that the consent of 70% of land owners be obtained for PPP projects. "
The Bill exempts the five categories mentioned above from this provision of the Act. In addition,  the Bill permits the government to exempt projects in these five categories from the following provisions, through a notification.
3.social impact assessment (सामाजिक प्रभाव आकलन)
कुछ लोगों के द्वारा अवाज उठायी जा रही है कि यह LARR ACT,2013  की आत्मा थी,मौजुदा विधेयक द्वारा ईस प्रावधान को हटा दिया जायेगा,जिस कारण यह 1894 के कानून के तुल्य हो जायेगी,परंतु मेरे अनुसार यह तर्क भी विवादास्पद और आधारहीन लग रहा है.
4. 2013 के कानून में अधिग्रहन से संबंधित कुछ restriction भी लगाये गये थे, जैसे - irrigated multi-cropped land cannot be acquired beyond the limit specified by the appropriate government.
लेकिन ईस विधेयक के जरिये ईस प्रकार के restriction को हटाकर एक अतिमहत्वपूर्ण कदम सरकार द्वारा उठाया गया है.
5. : The LARR Act, 2013 required land acquired under it which remained unutilised for five years, to be returned to the original owners or the land bank.  The Bill states that the period after which unutilised land will need to be returned will be: (i) five years, or (ii) any period specified at the time of setting up the project, whichever is later.
The Bill states that in calculating this time period, any period during which the proceedings of acquisition were held up: (i) due to a stay order of a court, or (ii) a period specified in the award of a Tribunal for taking possession, or (iii) any period where possession has been taken but the compensation is lying deposited in a court or any account, will not be counted.
यह विपक्ष की और लोगों की एक बेतुकी मांग है,ये लोग SEZ(special ecinomic zone) के लिये की गयी अधीग्रिहित भूमि का बार बार उदाहरण दे रहे है,जो पहली नजर में सही साबित हो सकती है लेकिन वर्तमान में नयी सोच की जरुरत है,नयी दृष्टिकोण की जरुरत है जो मौजुदा सरकार बखुबी अपना रही है और इसपर अमल कर रही है.
आज यह स्पष्ट हो चुका है कि सरकार का काम व्यापार करना नहीं है,हम उस दौर में रह रहे है,जो काफ़ी हद तक भूमंडलीकरन(globlisation) से प्रभावित हो चुके हैं अगर हम अपने आप को नयी दुनिया के साथ जोडने का प्रयास नहीं किये तो ईस प्रतिस्पर्धा(competition) के युग में पिछड़ जायेंगे.
6. Other changes
a)अब private hospital और educational institution के लिये भी भूमि अधिग्रहित की जा सकती है.
b)2013 के कानून के अनुसार अधिग्रहन केवल private company के लिये किया जा सकता था,लेकिन 2015 का नया विधेयक इसे बदलकर " private entity " कर दिया है और इसका परिभाषा ईस प्रकार दिया गया है, " A private entity is an entity other than a government entity, and could include a proprietorship, partnership, company, corporation, non-profit organisation, or other entity under any other law."
7. LARR ACT ,2013 में कहा गया था कि अगर सरकार द्वारा किसी तरह का गलती(offence) किया जाता है तो उसकी जिम्मेवारी उस विभाग के प्रमुख की होगी.
लेकिन अब ईस प्रावधान को हटा दिया गया है,यह प्रशासनिक (administrative) नजर से काबिलेतारीफ़ है,मतलब कार्य संस्कृति के लिये महत्वपूर्ण कदम है,अधिकारी अपने फ़ैसले खुलकर लेंगे,जो मौजुदा सरकार की"minimum government,maximum governance" का लक्ष्य पुरा करने में एक अगला कदम होगा.
it is related to only legal provision,next blog describes its impact.
blog coming soon.